दैनिक भास्कर हिंदी: ग्रीष्म में भी रेल यात्रियों को पीना पड़ेगा महंगा पानी, नहीं तैयार हुआ रेल नीर बॉटलिंग प्लांट

April 13th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। यात्रियों को शुद्ध पानी मिलने के लिए लगभग 7 वर्ष पहले रेल नीर बॉटलिंग प्लांट की घोषणा हुई थी। जिसका काम शुरू होकर वह पूरा भी हो चुका है। लेकिन इस बार भी उसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्ड ने प्रमाणित नहीं किया गया। ऐसे में इस ग्रीष्म में भी यात्रियों को महंगा पानी ही पीकर समय गुजारना पड़ेगा। हालांकि वर्ष 2016 के आखिर में इसे बनकर तैयार होना था। 

रेल परिसर व ट्रेनों में मिलनेवाला पानी कितना शुध्द है, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। खरीदार अपने फायदे व पानी बेचनेवाले अपने सुविधानुसार रेलवे में पानी बेचते हैं। ऐसे में कई बार अशुध्द पानी की शिकायतें रेलवे के सामने आई हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2013-14 में तत्कालीन रेलवे मंत्री पवन बंसल ने देशभर में कुछ जगहों पर नीर बॉटलिंग प्लांट की घोषणा की थी। जिसमें नागपुर भी शामिल था। इस प्लांट में रेलवे खुद का बोतल बंद पानी निर्माण कर मध्य रेलवे नागपुर मंडल अंतर्गत सभी स्टेशन व ट्रेनों में बेचेंगे।

15 रुपये में बोतलभर शुध्द पानी से सफर में यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद थी। आई आर सी टी सी के माध्यम से इसे बनना था। पहले कुछ जगहों पर बनाये प्लांट से अच्छी आमदनी के बाद वर्ष 2016 के आखिर तक नागपुर, नासिक, बिलासपुर, पारसाला, अंबाला, ललितपुर, अहमदाबाद, विजयवाड़ा, संकरेल, गुवाहाटी, जयपुर, हापुड और फरक्क में नये संयंत्र बनाने का लक्ष्य था। ऐसे में नागपुर में वर्ष 2017 के ग्रीष्म में सस्ता व अच्छा पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक यह सुविधा नहीं मिल पाई है। 

पानी की कमी से हो सकती है कालाबाजारी
मध्य रेलवे नागपुर मंडल अंतर्गत रेल नीर ही यात्रियों को बेचने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में गर्मियों में रेल नीर की मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में मंडल अंतर्गत बाहर से रेल नीर आने से कई बार बोतलों की कमी आ जाती है। ऐसे में दूसरे ब्रांड के पानी बेच कालाबाजारी की जाती है।