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  • Seven such villages of Chhindwara district where there is no crime before the formation of police station

दैनिक भास्कर हिंदी: छिंदवाड़ा जिले के ऐसे सात गांव जहां थाना बनने के पहले से कोई अपराध नहीं - गांव के बड़े-बुजुर्ग ही सुलझा देते हैं विवाद 

July 13th, 2021

अब तक एक भी मामला थाने नहीं पहुंचा, दूसरे गांवों के लिए प्रेरणादायी बने हुए हैं आदिवासी बाहुल्य वाले सात गांव
डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा ।
जिले में आदिवासी एवं मवासी बाहुल्य के सात गांव ऐसे हैं, जहां थाना बनने से पहले से अभी तक कोई अपराध नहीं हुए। इन गांवों में न कभी चोरी हुई, न कोई विवाद। मामूली कहासुनी हुई भी है तो गांव के ही बड़े बुजुर्ग सुलझा लेते हैं। आज तक इन गांव के लोगों ने थाने में कदम नहीं रखा है और न ही पुलिस को कभी अपराध के सिलसिले में यहां जाना पड़ा। ये सात गांव न केवल पुलिस के रिकार्ड में अपराधविहिन गांव के नाम से दर्ज हैं बल्कि दूसरे गांवों के लिए प्रेरणादायी बने हुए हैं। बड़ी बात तो यह है कि सभी गांव वनग्राम है। 
जिले के अपराधविहीन गांवों में दमुआ थाना क्षेत्र के ढोढरामऊ, सिवनीघाट, जुन्नारदेव थाना क्षेत्र के इमरतीखुर्द, नवेगांव थाना क्षेत्र के भीमसेनीमाल, माहुलझिर थाना क्षेत्र के पिंडरईपगारा के अलावा लावाघोघरी थाना क्षेत्र के दो गांव चरूडोह और पाठापीपला वीरान ग्राम शामिल है। जुन्नारदेव के ग्राम पंचायत तूमड़ा के इमरती खेड़ा गांव की जनसंख्या लगभग 300 के आसपास है। यहां पदस्थ सचिव का कहना है कि गांव में अभी तक किसी तरह के अपराध घटित नही हुए है। यही हाल ग्राम पंचायत बिचबेहरी के सिवनी घाट का भी है। इस ग्राम की जनसंख्या लगभग 375 के आसपास है। यह गांव भी अपराध मुक्त है। ग्राम पंचायत डुंगरिया भरदागढ़ के ग्राम भीमसेनी ढाना की जनसंख्या भी लगभग 650 के आसपास है और इस ढाने में भी किसी प्रकार की आपराधिक घटनाएं घटित नही हुई है।
बिजबेहरी पंचायत सचिव प्रदीप शिववंशी बताते है कि अपराधविहीन सिवनीघाट में कोई भी आयोजन हो सभी मिलकर मनाते है। हर सुख दुख में सभी एक दूसरे के साथ खड़े रहते है। यदि किसी परिवार में विवाह समारोह है और वह आर्थिक रूप से कमजोर है तो गांव के लोग आपस में मिलकर उनका सहयोग करते है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के मुताबिक तेल, अनाज समेत सामग्री उस परिवार के लिए मुहैया कराते है। 
कानून के प्रति सम्मान और आपसी भाईचारा
इन गांव के लोगों में आपसी भाईचार और कानून के प्रति सम्मान है। जिसका परिणाम है कि इन गांवों को अपराधविहीन गांव का दर्जा मिला है। पुलिस भी इन गांवों को लेकर चिंतामुक्त है। पुलिस अधिकारी इन गांव को आदर्श गांव मानते है। 
क्या कहते हैं अधिकारी
इनका कहना है
इन सात गांव के लोगों द्वारा कानून का सम्मान और आपस में एक दूसरे की भावना की कद्र करना सराहनीय बात है। ऐसे गांव और ग्रामीणों को आदर्श मानकर सभी को आपस में भाईचारे के साथ रहना चाहिए। 
- विवेक अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक

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