दैनिक भास्कर हिंदी: कृषि विधेयक पर शिवसेना-NCP का मौन समर्थन !

September 21st, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद कृषि विधेयकों के पारित होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरु है कि क्या शिवसेना-राकांपा ने विधेयक को मूक समर्थन दिया। भाजपा विधायक आशिष शेलार के एक ट्विट से इन आशंकाओं को बल मिला है। शेलार ने संसद में दोहरी भूमिका के लिए शिवसेना की आलोचना की है। जबकि राकांपा प्रवक्ता व राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक ने इन चर्चाओं को गलत बताते हुए खारिज किया है।

पूर्व मंत्री शेलार ने सोमवार को ट्विट कर कहा है कि शिवसेना ने सीएए के वक्त लोकसभा मे विधेयक का समर्थन कर राज्यसभा में यू टर्न लेते हुए विरोध किया था। और अब कृषि विधेयक का भी लोकसभा में समर्थन और राज्यसभा में सदन का वॉक आउट किया है। महाननगरपालिका से लेकर संसद तक शिवसेना की भूमिका सेम टू सेम है। जिस समय राज्यसभा में कृषि विधेयक पारित हुआ राकांपा अध्यक्ष व पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार सदन में मौजूद नहीं थे।

इस बारे में राकांपा प्रवक्ता व राज्य के कैबिनेट मंत्री मलिक कहते हैं कि संसद भवन परिसर में कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए पवार अधिक उम्र के कारण वहा दिल्ली से मुंबई लौट आए थे। उन्होंने कहा कि यह हमारी पार्टी का फैसला था कि अधिक आयु वाले सभी नेता संसद की कार्यवाही में हिस्सा न लें। शिवसेना सांसद अरविंद सावंत भी इस तरह की आशंका को यह कहते हुए खारिज करते हैं कि कृषि विधेयक पर हमारी पार्टी ने अपनी भूमिका पहले ही साफ कर दी थी। हमने विधेयक को लेकर सवाल उठाए थे।

इस पर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत कहते हैं कि, संसदीय लोकतंत्र में सभी को अपने फैसले लेने का अधिकार है। शिवसेना व राकांपा को संसद में अपनी भूमिका जाहिर करने का पूरा हक है। जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि अच्छा होता कि अच्छा होता यदि हमारा एक ही रुख होता। लेकिन शिवसेना और राकांपा की भूमिका के लिए उनके अपने कारण होंगे।

दबाव में आई राकांपा-शिवसेना 

दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राकांपा अध्यक्ष पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में आ गए और शिवसेना ने भी उनका अनुसरण किया। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में कृषि विधेयक पारित होने से पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शिवसेना व राकांपा के वरिष्ठ नेताओं से फोन पर बात कर विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी।   

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