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केवीआईसी की वर्कशेड योजना के तहत पक्के घर मिलने से पूर्वोत्तर के खादी कारीगरों के चेहरों पर मुस्कान

November 27th, 2020 17:18 IST
केवीआईसी की वर्कशेड योजना के तहत पक्के घर मिलने से पूर्वोत्तर के खादी कारीगरों के चेहरों पर मुस्कान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय केवीआईसी की वर्कशेड योजना के तहत पक्के घर मिलने से पूर्वोत्तर के खादी कारीगरों के चेहरों पर मुस्कान सुश्री नीरू कलिता से मिलिए, जो असम में नलबाड़ी जिले में एक 44 वर्षीय खादी कारीगर हैं। वह अपने परिवार के साथ, ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ से हुए मिट्टी-कटाव के कारण बेघर होने की कगार पर पहुंच गई थी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग उसकी मदद के आगे आया और कारीगर वर्कशेड योजना के तहत आयोग ने उन्हें घर देने का फैसला किया। केवीआईसी के अनुसार, सुश्री कलिता, पिछले 15 वर्षों से खादी स्पिनर के रूप में काम कर रही हैं। इस दौरान उन्हें अपने तीन बच्चों के साथ 14 बार घर बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि उनका अस्थायी आवास हर साल ब्रह्मपुत्र नदी में डूब जाता था। व्यथित परिवार के लिए जीवन अनिश्चित हो गया था। (नदी खोहोनिया के पीड़ित, असम की स्थानीय बोली में उल्लेख किया जाता है) सुश्री कलिता को नलबाड़ी जिले के तापाबोरी गांव में आश्रय मिला। इसी गाँव में केवीआईसी, परिवार के बचाव में आया और उसे एक पक्का घर दिया गया। केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि कारीगरों के लिए आजीविका सृजन के अलावा, आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया कि वे एक बेहतर स्थिति में काम करें जो अंततः उनकी उत्पादकता में सुधार करेगा। श्री सक्सेना ने कहा, "इस पहल को खादी के प्रमुख गांधीवादी सिद्धांत, "ग्रामीण पुनरुत्थान" के साथ जोड़ा गया है, जो प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण - सबका साथ, सबका विकास के अनुरूप है। सुश्री कलिता के परिवार में पाँच सदस्य हैं, जो खादी कताई से और ज़मीन के एक छोटे से हिस्से पर खेती करके अपनी आजीविका चलाते हैं। हाल के वर्षों में लगातार मिट्टी-क्षरण के कारण, उनकी कृषि भूमि अब ब्रह्मपुत्र नदी के बीच में चली गयी है और इस तरह खादी कताई ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत रह गया है। सुश्री कलिता ने घर प्राप्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब मैं एक पक्के घर में रह रही हूं। नदी की बाढ़ के कारण हर साल हमें नए स्थान पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, लेकिन सरकारी अधिकारियों से कभी कोई सहायता नहीं मिली। केवीआईसी द्वारा दिए गए इस घर ने मेरे परिवार की सभी चिंताओं को खत्म कर दिया है। अब मैं बेहतर स्थिति में काम कर सकती हूं और मेरे बच्चे सुरक्षित आवास में रह सकते हैं।’’ उल्लेखनीय है कि केवीआईसी ने पिछले तीन वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में 411 खादी कारीगर परिवारों को मकान प्रदान किए हैं। कारीगर वर्कशेड योजना के तहत, केवीआईसी और संबंधित खादी संस्थानों की वित्तीय सहायता से कारीगरों को किफायती पक्का घर प्रदान किया जाता है। 66,000 रुपये की लागत वाले इन घरों का डिजाईन आईआईटी, गुवाहाटी के परामर्श से तैयार किया गया है। केवीआईसी द्वारा 60,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं तथा शेष 6000 रुपये का योगदान उन खादी संस्थानों द्वारा किया जाता है, जिनमें कारीगर पंजीकृत होते हैं।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।