दैनिक भास्कर हिंदी: सोनिया-प्रियंका और ओवैसी पर UP में शिकायत दर्ज, CAA के खिलाफ दिया था भड़काऊ बयान

December 24th, 2019

हाईलाइट

  • अदालत ने शिकायत को स्वीकार किया
  • 24 जनवरी 2020 को होगी मामले की सुनवाई

डिजिटल डेस्क, अलीगढ़। उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत में कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर शिकायत दर्ज की गई है। इन नेताओं पर नागरिकता संशोधित कानून (CAA) के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया है।

वकील प्रदीप गुप्ता द्वारा दायर की गई शिकायत में सोनिया-प्रियंका और ओवैसी के अलावा पत्रकार रवीश कुमार का नाम भी शामिल हैं। अदालत ने शिकायत को स्वीकार कर लिया है और मामले की सुनवाई 24 जनवरी 2020 को होगी। प्रदीप ने शिकायत में बताया कि इन नेताओं और पत्रकार ने CAA के खिलाफ भड़काऊ भाषणबाजी की और लोगों में भ्रम फैलाया, जिस कारण उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएं हुईं।

बता दें कि कांग्रेस ने सोमवार को नागरिकता संशोधित कानून (Citizenship Act) के खिलाफ विरोध और तेज कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दिल्ली स्थित राजघाट पर ‘एकता के लिए सत्याग्रह’ किया। वहीं इसकी सहयोगी द्रमुक ने चेन्नई में बड़ी रैली आयोजित की।
 
क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 में कुल 6 धाराएं हैं। इस अधिनियम में अफगानिस्तान, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान में इन नागरिकों पर उत्पीड़न तथा शरणार्थी होने का कोई उल्लेख नहीं है। मूल नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 2(1) (ख) में अवैध प्रवासी की परिभाषा दी गई है, जिसे घुसपैठिया कहा जा सकता है।

समाज सेवी संस्था मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति के अध्यक्ष तथा कानून के जानकर एडवोकेट नदीम उद्दीन कहते हैं कि इस कानून में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा व्यक्ति जो वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करता है या वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों से प्रवेश करने वाला ऐसा व्यक्ति है जो दस्तावेजों में इजाजत की अवधि के बाद भी रह जाता है, शामिल है।

धारा 1 में नाम तथा विस्तार के बाद नए नागरिकता कानून की धारा 2 से धारा 2(1) (ख) में परन्तु जोड़कर यह अपवाद जोड़ा गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैैन, पारसी या ईसाई समुदाय के ऐसे व्यक्ति जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पूर्व भारत में प्रविष्ट हुआ और केंद्र सरकार द्वारा पासपोर्ट तथा विदेशी विषयक अधिनियम से छूट दी गई है तो वह अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा।

धर्म के आधार पर उत्पीड़न का उल्लेख नहीं    
इस अधिनियम में कहीं भी शरणार्थी तथा धर्म के आधार पर उत्पीड़न का उल्लेख नहीं किया गया है, जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है। यहां बता दें कि शरणार्थियों तथा वैध रूप से भारत में रह रहे विदेशियों के लिए पहले से ही नागरिकता का प्रावधान है, जिसके लिए इस कानून की आवश्यकता ही नहीं है। वैसे भी भी नागरिकता प्रदान करना एक निरन्तर प्रक्रिया है।

इस कानून से किसी भी व्यक्ति को स्वयं नागरिकता नहीं मिलेगी बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश का घुसपैठिया बताते हुए उसे आवेदन करना पड़ेगा तथा नागरिकता की शर्ते पूर्ण करने व उसका आवेदन अधिकारियों द्वारा स्वीकार करने पर ही नागरिकता मिलेगी। इस कानून से पहले भी लंबी अवधि के वीजा धारक विभिन्न पात्र शरणार्थी अधिकारियों के नागरिकता के लिए चक्कर लगा रहे हें और उन्हें नागरिकता नहीं मिल पा रही है। अब इस लाइन में लाखों लोग और बढ़ जाएंगे। 

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