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खास होती है फुटपाथ की पार्लियामेंट , चाय पर चर्चा बदल देती है राजनीतिक हवा का रुख

खास होती है फुटपाथ की पार्लियामेंट , चाय पर चर्चा बदल देती है राजनीतिक हवा का रुख

डिजिटल डेस्क,मुंबई।  हाथ में चाय का कप थामे नरेंद्र मोदी को साढ़े पांच वर्ष पहले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में देश भर के कोने-कोने में फैली चाय की दुकानों पर इकट्ठा हुजूम से ‘चाय पे चर्चा’ करते सुनना एक अनुभव था। फुटपाथ की सबसे बड़ी पार्लियामेंट पर देश के सबसे मशहूर चायवाले से ‘चाय पे चर्चा’- जो सोशल मीडिया के फेसबुक, ट्विटर, एंड्रायड-हर प्लैटफॉर्म पर मौजूद थी-कोई एकतरफा संवाद नहीं था। बीते लोकसभा चुनाव में भी यह नजारा मुंबई सहित कई जगहों पर देखा गया। इस बार के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी चाय की दुकानों पर विभिन्न दलों के प्रत्याशी और प्रचारक जुट रहे हैं, पर ‘चाय पर चर्चा’ के लिए नहीं, ‘चाय पर खर्चा’ के लिए।

ठाणे के मनसे प्रत्याशी अविनाश जाधव को इन दिनों जब भी चाय की तलब लगती है, वे पार्टी कार्यालय के पास राजेश रहाटे के टी स्टाल पर आ रहे हैं। दिन में कम से कम पांच से छह बार-जब भी वे इस दुकान पर आते हैं उनके साथ कार्यकर्ताओं और प्रचारकों का दल भी मौजूद होता है। अपने विशेष फ्लेवर के लिए पूरे ठाणे में मशहूर पंढरपुरी चाय के इस स्टॉल की बिक्री इन दिनों काफी बढ़ गई है।

मुलुंड के भाजपा प्रत्याशी मिहिर कोटेचा जिस स्वप्न नगरी इलाके में रहते हैं वहां की चाय दुकानें भी हर वक्त व्यस्त हैं। दादर के शिवसेना भवन के पास मनोहर भोसले के वडा-पाव स्टाल के कर्मचारियों को इन दिनों दम लेने की फुर्सत नहीं है। नरीमन पाइंट स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय के पास चाय का स्टाल चलाने वाले नीरज जोशी का धंधा भी चोखा है।

यही नजारा कुमार चाय स्टॉल और अशोक टी सेंटर (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के निकट), टी सेंटर (रेशम भवन), अशोक टी ऐंड कोल्ड ड्रिंक सेंटर (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के निकट), यजदानी बेकरी (कावसजी पटेल स्ट्रीट), गुड लक कफे (बांद्रा पश्चिम), पृथ्वी कफे (जुहू), सोनू (गोरेगांव), हरीश चायवाला (नरीमन पाइंट), नीलेश टी और आमेर सिंह (लोअर परेल), छोटू चायवाला (बांद्रा), बोरा बाजार चायवाला (बोरा बाजार), खुशाली चाय (मुगल मसिजिद), जनता सेवा स्टाल (कमला मिल के पीछे), शंकर चाय वाला (प्रार्थना समाज), पंचरत्न टी स्टॉल (ऑपेरा हाउस) और बब्बन चायवाला (दादर) के टी स्टॉलों पर भी है।

पुराना है मुंबई और चाय का रिश्ता

केरल की ‘वाम क्रांति’ चाय की दुकानों की ही ऊपज कहलाती है, पर मुंबई की ‘कटिंग चाय’ और चुनाव का रिश्ता भी बहुत पुराना है। भारत भर में सबसे ज्यादा चाय की खपत मुंबई में ही होती है। मुंबई के बाहर कुछ मशहूर चाय वाले हैं पप्पू चाय वाला (बनारस), दीपूजी (दिल्ली यूनिवर्सिटी), नमो स्टॉल्स (पटना), राजेंद्रन (चेन्नै), सैयद बिलाल यासनी (हैदराबाद) और पद्मिनी (त्रिवेंद्रम)। मुंबई से चाय का रिश्ता कुछ और तरह से भी जुड़ा है।

मुंबई टी पार्टीः नया कविता आंदोलन, जिसके अंतर्गत विभिन्न भाषाओं के कवि चाय की विभिन्न दुकानों पर मिलते हैं और एक-दूसरे की भाषाओं में कविताओं का अनुवाद करते हैं। ऐसा एक पोएट्री फेस्टिवल पिछले ही दिनों मुंबई में संपन्न हुआ है।
चाय डायरीः मुंबई में पैदा हुए ‘चाय डायरीज’ के संस्थापक अमि भंसाली 40 तरह के फल-फूलों के स्वाद से पगी प्रीमियम टी ‘चाय डायरीज’ बेचते हैं। उनकी चाय ऑनलाइन स्टोर Mychaidiaries.com पर उपलब्ध है।
चाय वॉकः ‘टी ट्रंक’ की 30 वर्षीय स्निग्धा मनचंदा पिछले दो वर्ष से देश के राष्ट्रीय पेय के शौकीनों को मुंबई के चाय रूट का इंटरऐक्टिव वॉक करा रही हैं।
चाय यात्राः ‘भारत में हम जहां भी जाते हैं चाय होती है, चायवाला और संभवत: एक कहानी’ कहने वाले अमेरिकी युगल रेशम और जैख मार्क की ‘चाय यात्रा’ भारत भारत की चाय संस्कृति पर फिल्म और किताब है। 
टी ट्रेल्सः दंपती उदय माथुर और कविता माथुर का देसी शैली का स्टार्टअप।
स्टीप्ड ऐंड स्टायर्डः चाय पर श्वेता घोष की डॉक्यूमेंटरी फिल्म।
टी पार्टीः ‘टी पार्टी मूवमेंट’ अमेरिका में मशहूर है। ओडिशा के केलर गांव में 54 वर्षीय अहिल्या कंदपन ने अपनी ‘टी पार्टी’ के जरिए सरकारी खजाने के दुरुपयोग के विरुद्ध आवाज उठाकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की है।

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