दैनिक भास्कर हिंदी: खुदकुशी करने वाले सांसद डेलकर ने मदद के लिए मोदी-शाह सहित कईयों को लिखा था पत्र

March 13th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दादरा-नगर हवेली के सांसद मोहनभाई डेलकर को केंद्रीय प्रशासकिय अधिकारियों और भाजपा नेताओं के चलते आत्हत्या करनी पड़ी है। मुंबई आकर अपनी जान देने से पहले डेलकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर अपनी व्यथा बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। लेकिन प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृहमंत्री ने डेलकर की याचना को अनसुना कर दिया। यह बात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कही है। डेलकर द्वारा पीएम व केंद्रीय गृहमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने यह आरोप लगाए हैं। 

शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सावंत ने कहा कि सात बार सांसद चुने गए व्यक्त के जीवन मरण का प्रश्न था। यदि उनके पत्र का संज्ञान लिया गया होता तो डेलकर आज इस दुनिया में होते। कांग्रेस नेता ने कहा कि डेलकर ने लोकसभा विशेषाधिकार हनन समिति के सामने अपनी बात रखी थी। विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष को इस बात का खुलासा करना चाहिए कि क्योंकि उन्होंने आत्महत्या के संकेत दिए थे। सावंत ने कहा कि डेलकर को लगातार परेशान किया जा रहा था। 20-20 साल पुराने मामलों में उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे।

परिजन को जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी। इसको लेकर डेलकर ने 18 दिसंबर 2020 और 31 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने पीएम से मुलाकात का समय मांगा था। इसी तरह उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को 18 दिसंबर 2020 और 12 जनवरी 2021 को पत्र भेजा था। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला को 18 दिसंबर 2020, 12 जनवरी 2021 व 19 जनवरी 2021 को पत्र भेजा था। डेलकर ने इसी तरह का पत्र 13 जनवरी 2021 को संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र यादव को भी लिखा था। इतने लोगों को पत्र भेजने के बावजूद डेलकर को कोई मदद नहीं मिल सकी। 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल किया कि क्या इन सभी ने जानबूझ कर डेलकर के पत्रों पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि 12 फरवरी 2021 को लोकसभा के विशेषाधिकार समिति के सामने अपनी शिकायतों की सुनवाई के दौरान मोहन डेलकर ने समिति के सदस्यों के सामने अपनी व्यथा बताते हुए कहा था कि मैं सांसद पद से इस्तीफा दे दूं या फिर आत्महत्या कर लूं, मेरे पास अब बस यहीं दो विकल्प बचे हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है, समिति को इसका खुलासा करना चाहिए। समिति के सामने हाजिर होने के 10 दिनों बाद डेलकर ने आत्महत्या कर ली थी।