दैनिक भास्कर हिंदी: सुसाईड नोट आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का सबूत नहीं, तीन पुलिसकर्मियों को अग्रिम जमानत 

September 29th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। आत्महत्या से पहले लिखा गया पत्र (सुसाइड नोट) उकसाने का पुष्ट सबूत नहीं है। बांबे हाईकोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी तीन पुलिसवालों को अग्रिम जमानत देते हुए यह बात कही है। सहायक पुलिस उपनिरीक्षक प्रशांत कनेटकर ने अलीबाग स्थित पुलिस स्टाफ क्वाटर में 18 अगस्त 2019 को आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद कनेटकर की पत्नी ने अलीबाग पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस निरीक्षक प्रकाश लंगी, हेड कांस्टेबल विजय बनसोड, पुलिस नाइक रविंद्र सालवी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। तीनों पर कनेटकर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। कनेटकर की पत्नी ने दावा किया था कि जब उसके पति  स्टेट इंटेलिजेंस विभाग (एसआईडी) की मुंबई शाखा के कंट्रोल रुम में कार्यरत थे, उस समय उनके पति पर पुलिस निरीक्षक लंगी ने पर्स चुराने का आरोप लगाया था। यहीं नहीं इस घटना के चलते पुलिस कांस्टेबल उस पर ताने मारते थे। इसके कारण मेरे पति ने मुंबई से तबादले का आग्रह किया था। जिसके बाद मेरे पति का अलीबाग में तबादला हो गया था। 

एपीएसआई खुदकुशी मामले में हाईकोर्ट ने तीन पुलिसकर्मियों को दी अग्रिम जमानत 

कनेटकर की पत्नी के अनुसार अलीबाग अाने के बावजूद मेरे पति मुंबई में हुए अपमान को भूल नहीं पाए थे और जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली। मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए आरोपी पुलिसकर्मियों ने अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल के सामने जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदरगी ने कहा कि जब पुलिस नियंत्रण कक्ष से लंगी का पर्स गायब हुआ उस समय वहां पर कनेटकर के अलावा कोई और मौजूद नहीं था। ऐसे में उस पर पर्स चुराने का शक व्यक्त करना तर्कसंगत है। उन्होंने कहा कि एसआईडी से जुड़ा सारा मामला अक्टूबर 2018 में खत्म हो गया था। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को अलग-अलग स्थान पर भेज दिया गया था। फिर तीनों कभी कनेटकर के संपर्क में नहीं आए। 
न्यायमूर्ति ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बात कहा कि कनेटकर का सुसाइड नोट दर्शाता है कि वह अकेलापन महसूस कर रहा था और हमेशा  मुंबई के पुलिस नियंत्रण कक्ष में घटी घटना के बारे में सोचता रहता था। न्यायमूर्ति ने कहा कि सिर्फ शक करना व ताने मारना उकसाना नहीं हो सकता। सुसाइड नोट में आरोपियों का नाम है लेकिन सिर्फ इससे आरोपियों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। सुसाइट नोट आत्महत्या के लिए उकसाने का पुष्ट सबूत नहीं हो सकता है। यह बात कहते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। 
 

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