दैनिक भास्कर हिंदी: दिवाली पर मुंह मीठा करें लेकिन संभल कर , सेहत के लिए घातक हो सकती है मिठाई

October 23rd, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दिवाली पर मुंह मीठा करना तो बनता है, लेकिन खुशी की मिठाई सेहत के लिए कड़वी साबित हो सकती है। त्योहार में बड़ी मात्रा में मिठाइयों की मांग को देखते हुए मिलावटी और खराब क्वालिटी वाले खोवा पहुंचने लगा है। पिछले दिनों शहर में बड़ी मात्रा में नकली खोवा और मिलावटी तेल जब्त किया जा चुका है। साफ है कि त्योहार में बड़े स्तर पर मिलावटी मिठाइयों के बाजार में आने की आशंका है। हालांकि अन्न व औषधि नियंत्रण विभाग का दावा है कि पूरे बाजार पर विभाग की नजर है। विभाग हर तरह के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज रहा है। एफडीए की टीम खोवा, कुंदा, बर्फी, रसगुल्ला के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजना शुरू कर दिया है। विभाग के अनुसार खोवा के 6, कुंदा के 4, बर्फी के 2 और रसगुल्ला का 1 यानी कुल 13 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके साथ ही पिछले दिनों छापे की कार्रवाई में शहर भर से लगभग 11 लाख के मूल्य का 644 किलो नकली खोवा जब्त किया गया है। जब्त सैंपलों की जांच और रिपोर्ट आने में थोड़ा भी वक्त लगा तो दिवाली मन चुकी होगी और सभी मिठाइयां दुकानदार खपा चुके होंगे।

खुद करें मिलावट की पहचान
खोवा - नकली खोवे की जांच करने के लिए खोवे को मसल कर देखें। यदि वह गीला और आटे की लोई की तरह है तो शुद्ध है। यदि सूखा व टूट कर दरदरा हो रहा है और पाउडर दिख रहा है तो उसमें मिलावट है। वह नकली भी हो सकता है। 

चांदीवर्क - असली वर्क की पहचान करने हाथ से रगड़ें, वर्क चांदी का होगा तो रगड़ते ही मिठाई से अलग होकर हाथ में लग जाएगा। वर्क चांदी का नहीं होगा तो मिठाई में चिपका रहेगा।

पांच हजार किलो खराब सोनपापड़ी हुई थी जब्त
इसी वर्ष जनवरी में एफडीए की टीम ने पांचपावली से 3.16 लाख रुपए मूल्य की खराब क्वालिटी की सोनपापड़ी जब्त की थी। विभाग के अनुसार सोनपापड़ी में उपयोग में लाए गए रंग लेकर हर तरह का खराब गुणवत्ता वाला था। यहां तक कि पिस्ता की जगह मूंगफली को हरे रंग में रंग कर उपयोग किया जा रहा था और रंग भी खाने के लायक नहीं था।

सेहत पर असर
मिलावट के दुष्परिणाम सेहत पर कुछ समय बाद दिखता है। यह धीमा जहर है और लिवर, किडनी, आंतों समेत कई अहम अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही मिठाइयों को आकर्षक रंग देने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सिंथेटिक कलर से भी कई तरह की बीमारियों का खतरा होता है। आजकल खाने-पीने की चीजों में फूड ग्रेड कलर की जगह सिंथेटिक कलर का उपयोग आम होता जा रहा है। सिंथेटिक कलर से सेहत को नुकसान पहुंचता है। इस तरह के कलर वाली चीजें ज्यादा लंबे समय तक खाने से पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह कलर लिवर को नुकसान पहुंचाने के अलावा कैंसरकारक भी होता है। ऐसे में मिठाइयां खरीदते समय हम सभी लोगों को इन बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत है।

विभाग की सलाह भरोसेमंद दुकान से खरीदें मिठाई
विभाग दिवाली पर शहर के लोगों का मिलावटी मिठाई से बचाने के लिए मुस्तैद हैं। शहर में कई जगह छापे की कार्रवाई कर खराब माल जब्त भी किया गया है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इसके साथ ही अपील है कि दिवाली के त्योहार में भरोसे वाली दुकानों से मिठाई खरीदें, जहां से हमेशा खरीदते रहे हैं। भरोसा वाले दुकानों से खरीदने पर मिलावट की आशंका कम रहती है।  - चंद्रकांत पवार, सह आयुक्त एफडीए