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दैनिक भास्कर हिंदी: अपराध एक जैसा पर दोनों थानों में अलग-अलग धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा!

June 17th, 2021

नशीले कफ सिरप का गोरखधंधा - संजीवनी नगर थाने के प्रकरण में ड्रग एक्ट पर कायमी, जबकि माढ़ोताल पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत की कार्रवाई
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
एक जैसा अपराध, एक जैसे प्रतिबंिधत मादक पदार्थ की बरामदगी, लेकिन धाराएँ.. थानों के हिसाब से अलग-अलग। 
जानकर हैरानी होगी, लेकिन सच्चाई यही है। दोनों थानों में एक जैसे अपराध पर अलग-अलग तरह से कायमी की। एक ने केस को काफी कमजोर बनाया, जबकि दूसरे में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें जमानत तक मिलना आसान नहीं। बेहद जहरीले और प्रतिबंधित कफ सीरप की अवैध खरीद-फरोख्त का धंधा बेधड़क चल रहा है। खास बात यह है कि पुलिस कई मर्तबा मामले तो दर्ज करती है, लेकिन असल मुजरिम तक पहुँच नहीं पाती। कई बार एप्रोच और दूसरे हथकंडे अपनाकर भी असली आरोपी बच निकलते हैं। सही मायनों में देखा जाए तो पुलिस का रवैया भी उतना सख्त नहीं रहा है। एक ही तरह के अपराध में संजीवनी नगर और माढ़ोताल थाने में अलग-अलग धाराओं पर दर्ज किया गया मुकादमा इसी लचर सिस्टम की तरफ इशारा करता है। 
संजीवनी नगर
*    कहाँ से आई खेप, अभी तक पता नहीं।
*    अपराध- ऑनरेक्स कफ की बरामदगी।
*    मुकदमा- मप्र ड्रग कन्ट्रोल एक्ट 1949 की धारा 5, 13, आईपीसी 328 पर कायमी।  
*    एक स्कॉर्पियो वाहन में सवार 2 आरोपियों से 12 जून को पुलिस ने 28 शीशी ऑनरेक्स कफ सिरप को जब्त किया। 
*    आरोपी चोरी-छिपे इस प्रतिबंधित सिरप को लेकर जा रहे थे और इस संबंध 
में उनके पास जरूरी दस्तावेज भी नहीं थे। 
02:- माढ़ोताल
*    एमआर की भूमिका, लेकिन सोर्स पता नहीं।
*    अपराध- ऑनरेक्स कफ की बरामदगी।
*    मुकदमा- एनडीपीएस एक्ट की धारा 8, 21, 22 तथा मप्र ड्रग कंट्रोल एक्ट की धारा 5/13 पर दर्ज।  
*    कृष्णा सिटी मोड़ के पास खड़े 3 वाहन सवारों को पुलिस ने 15 जून को दबोचा। इनके पास से 120 नग सिरप की शीशी बरामद  की गईं। साथ ही सिरप की बिक्री के रुपए भी मिले। इनमें से 1 आरोपी एमआर है। इनके नेटवर्क पर पुलिस को खास सफलता हासिल नहीं हो पाई है।
जबलपुर में पहली बार
प्रतिबंधित सिरप की बरामदगी कोई पहला मामला नहीं, लेकिन जबलपुर में एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई यह पहली कार्रवाई है। मात्रा काफी ज्यादा होने के कारण एनडीपीएस लगाया गया है। हालाँकि इससे पहले भी बड़ी मात्रा में सिरप पकड़ा जा चुका है। इसके बावजूद इन धाराओं का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। यह नहीं बताया जा सकता। 
गोपाल प्रसाद खाण्डेल, एएसपी
कोडीन फास्फेट कितना खतरनाक?
सिरप में मुख्य घटक (इनग्रीडिएंट) कोडीन फास्फेट है जो दर्द और खाँसी से राहत देने वाली दवाओं में पाया जाता है।  इसे हल्के नारकोटिक के तौर पर भी जाना जाता है। इसे अकेले या अन्य दवाओं के साथ मिलाकर भी दिया जाता है। शरीर में पहुँचने पर लिवर एक एंजाइम की मदद से इसे मॉर्फीन में तब्दील कर देता है। कई लोगों में इसके मॉर्फीन में तब्दील होने की गति बहुत तेज होती है। इसके कारण इनके खून में मॉर्फीन का लेवल तेजी से बढ़ जाता है जो मौत का कारण भी बन सकता है। यही वजह है कि बगैर चिकित्सक के प्रिसक्रिप्शन के यह बेचा नहीं जा सकता। 
 

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