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त्रिदिवसीय कराडे नाट्य महोत्सव : फांस में दिखी किसानों की पीड़ा, बापू में गांधीजी का अकेलापन

त्रिदिवसीय कराडे नाट्य महोत्सव : फांस में दिखी किसानों की पीड़ा, बापू में गांधीजी का अकेलापन

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  नाटक ‘फांस’ के मंचन के साथ  त्रिदिवसीय कराडे नाट्य महोत्सव का समापन हुआ। 27 से 29 सितंबर तक चले महोत्सव में नाटक बापू, असमंजस बापू,  लीला नंदलाल की और फांस नाटक का मंचन हुआ। वनामति में हुए नाट्य महोत्सव का आयोजन राष्ट्रभाषा परिवार, नागपुर की ओर से किया गया था।   प्रस्तुत नाटक ‘फांस’ में किसान विरोधी नीति, उपेक्षा, कर्ज की मार, घाटे की खेती के बीच पारिवारिक तनाव में जीते किसान और उसके पलायन के बाद उसका अन्य किसान परिवारों पर असर, धार्मिक आंडबर की कहानी पेश की गई। संजीव की कहानी पर आधारित ‘फांस’ का नाट्य रूपांतरण संजय शाह ने किया है। भारतीय जन नाट्य संघ, रायपुर की इस प्रस्तुति में परिकल्पना एवं निर्देशन मिनहाज असद ने किया है। 

‘बापू’ में बताया गया गांधीजी का अकेलापन
महोत्सव की शुरुआत 27 सितंबर को नाटक ‘बापू’ के मंचन से हुई थी। देश की आजादी के ठीक पहले और आजादी मिलने के पांच माह बाद, जिस दिन राष्ट्रपिता बापू की हत्या की गई, इन दिनों के बीच में हुई घटनाओं को बड़े ही संजीदा तरीके से नाटक बापू में दिखाया गया। नाटक के माध्यम से बताया गया कि उन मुश्किल दिनों में गांधीजी का अकेलापन एक कचोटने वाली सच्चाई है, जिसे हमें समझना है। नट मंडप पटना की ओर से पेश नाटक के निर्देशक परवेज अख्तर हैं। पटकथा नंदकिशोर आचार्य की है। शनिवार 28 सितंबर को असमंजस बापू और लीला नंदलाल की का मंचन हुआ। 

जिले को गीला आपदाग्रस्त घोषित करने की मांग
जिले को गीला आपदाग्रस्त घोषित करने की मांग ग्रामीण कांग्रेस ने की है। मांग को लेकर 1 अक्टूबर को उपविभागीय कार्यालय सावनेर में निवेदन दिया जाएगा। जिला परिषद के पूर्व िवरोधी पक्ष नेता मनोहर कुंभारे ने पत्रकार वार्ता में कहा कि दो माह से हो रही बारिश से जिले में फसल को काफी नुकसान हुआ है। फसल सड़ने लगी है। बारिश से खेतों को नुकसान हुआ है। कुएं खिसके हैं। सोयाबीन, तुअर की फसल खराब हुई है। संतरा की फसल को नुकसान हुआ है। 6 व 18 सितंबर को हुई बारिश की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार 392 हेक्टेयर कपास व 70.8 हेक्टेयर तुअर व 9 हेक्टेयर अन्य फसल को नुकसान हुआ है। किसान संकट में है। पत्रकार वार्ता में प्रकाश वसु, सतीश लेकुरवारे, अशोक भागवत, बाबासाहब बोंडे, शेषराव राहटे आदि उपस्थित थे। 

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