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जीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए उद्धव ने वित्तमंत्री को लिखा पत्र, केंद्र के पास लंबित है 15,558 करोड़

जीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए उद्धव ने वित्तमंत्री को लिखा पत्र, केंद्र के पास लंबित है 15,558 करोड़

डिजिटल डेस्क, मुंबई। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की प्रतिपूर्ति और कर वापसी की रकम राज्य को जल्द से जल्द मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह मांग करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। पत्र में ठाकरे ने लिखा है कि राज्य सरकार को अभी केंद्र सरकार से 15 हजार 558 करोड़ 5 लाख रुपए की रकम मिलनी है और कम रकम मिलने का असर राज्य के विकास कामों पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ठाकरे ने पत्र में यह भी लिखा है कि साल 2019-20 के केंद्रीय बजट में महाराष्ट्र को केंद्र सरकार से मिलने वाली रकम 46 हजार 630 करोड़ 66 लाख रुपए थे। जो साल 2018-19 के 41 हजार 952 करोड़ 65 लाख रुपए से 11.15 फीसदी ज्यादा थी। लेकिन 2019 के अक्टूबर महीने तक राज्य को 20 हजार 254 करोड़ 92 लाख रुपए ही मिले। यानी बढ़े हुए बजट के मुकाबले राज्य को काफी कम रकम प्राप्त हुई। दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की मंदी को देखते हुए लगता है कि आगे भी केंद्र सरकार से राज्य को कम रकम मिलेगी। ठाकरे ने पत्र में आगे लिखा है कि अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते 14 फीसदी के अनुमानित जीएसटी संकलन से कम रकम मिली है। जीएसटी के प्रतिपूर्ति के रूप में मौजूदा वित्तवर्ष के पहले चार महीनों में राज्य को 5 हजार 635 करोड़ रुपए ही मिले। नवंबर महीने में मिलने वाली 8 हजार 611 करोड़ 76 लाख रुपए की रकम अभी दी जानी बाकी है। ठाकरे ने राशि जल्द देने का आग्रह करते हुए पत्र में लिखा है कि पैसे न मिलने के चलते कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं। 

सांसद सावंत ने लोकसभा में उठाया मुद्दा

उधर नई दिल्ली में शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने बुधवार को लोकसभा में मुद्दा उठाया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा राज्य के हिस्से का जीएसटी प्रतिपूर्ति भुगतान किए जाने के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। विशेष उल्लेख के तहत इस मुद्दे को उठाते हुए सांसद सावंत ने राज्य के हिस्से का जीएसटी प्रतिपूर्ति भुगतान नही मिलने पर चिंता जताई और कहा कि जीएसटी समझौते के अनुसार महाराष्ट्र सरकार को न्याय नही मिल रहा है। उन्होने कहा कि इस वर्ष राज्य सरकार को 15,558 करोड़ रुपये जीएसटी प्रतिपूर्ति का भुगतान होना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा पत्र लिखने के बाद भी केन्द्र की सरकार इसका संज्ञान नही ले रही है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार का महाराष्ट्र के प्रति जो कर्तव्य हैं, उसे निभाना चाहिए। केन्द्र सरकार से अगर राशि नही मिलती है तो इसका राज्य के विकास पर बुरा असर होगा।
 

जीएसटी वसूली में नागपुर विभाग 13 फीसदी पिछड़ा

दूसरी ओर नागपुर विभाग की बाद करें तो अब भी जीएसटी वसूली पिछड़ा हुआ है। विशेष बात यह है कि जीएसटी राज्य अक्टूबर के टार्गेट पूरा नहीं कर सकी जिसकी वजह से नागपुर विभाग 13 फीसदी पीछे चल रहा है। उल्लेखनीय है कि जीएसटी आने के बाद से केन्द्र और राज्य दोनों कर केन्द्र सरकार के पास जमा होते है। ऐसे में केन्द्र सरकार द्वारा राज्य को वह अनुदान दिया जाता है जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों और संस्थाओं को वितरित किया जाता है। जिससे विभाग कर्मचारियों के वेतन सहित विभाग के अन्य कार्यों को क्रियान्वित किया जाता है लेकिन हैरानी की बात यह है कि नागपुर विभाग जीएसटी कर वसूली में िपछड़ा हुआ है। उधर विभाग का व्यापारियों से आग्रह है कि अक्टूबर माह का कई सारे लोगों को रिटर्न बकाया है ऐसे में व्यापारियों को जल्द से जल्द भरकर असुविधाओं से बचना चाहिए।

क्या कहते हैं आंकड़े

जीएसटी राज्य को वर्ष 2019-20 में 2958.54 करोड़ रुपए वसूल करने का लक्ष्य मिला था जबकि अक्टूबर 2019 तक जीएसटी विभाग को 1725.82 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी लेकिन 1501.78 करोड़ रुपए ही वसूल कर पाया है। 

टॉप पर नांदेड़

जीएसटी वसूली में राज्य में सबसे टॉप पर नांदेड़ विभाग है। उसके द्वारा टार्गेट का करीब 41 फीसदी अधिक वसूल किया गया है। जबकि दूसरे और तीसरे नंबर पर पुणे विभाग के 4 और 1 जोन है जो क्रमश: 11 और 7 बताए जा रहे है।

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