दैनिक भास्कर हिंदी: किसान आत्महत्या रोकने VNSSM ने पेश किया 10 सूत्रीय कार्यक्रम

March 7th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश में किसान आत्महत्या को लेकर सबसे पहले आवाज उठाने वाले विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष और अब राज्य सरकार के वसंतराव नायक शेती स्वावलंबन मिशन (वीएनएसएसएम) का अध्यक्ष के पद संभाल रहे किशोर तिवारी ने किसान आत्महत्या रोकने 10 सूत्री कार्यक्रम पेश किया है। तिवारी ने शनिवार को राज्य के नवनियुक्त मुख्य सचिव सीताराम कुंटे से मुलाकात कर उन्हें पत्र सौंपा।

तिवारी ने बताया कि उनकी ओर से, कुंटे ने कृषि विभाग को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक उपाय शुरू करने का निर्देश दिया।राज्य के विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र पिछले लगभग 25 वर्षों से एक गंभीर कृषि संकट की चपेट में हैं, जिससे हजारों कृषकों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा और यह सिलसिला अब भी जारी है। तिवारी ने कुंटे से कहा, "उपायों, सरकारों द्वारा राहत पैकेज या लगातार पांच लाख करोड़ रुपये की कर्जमाफी देने के बावजूद मूल मुद्दे अछूते हैं और किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए इनसे निपटने की जरूरत है।"

क्या है 10 सूत्रीय कार्यक्रम

राज्य इनपुट लागत में कमी और उत्पादन लागत हस्तक्षेप से निपटेगी, स्थानीय और वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार फसल पैटर्न में बदलाव, नई कृषि ऋण नीति में क्रेडिट-साइकल की लगातार विफलता रोकना, माध्यमिक आजीविका प्रबंधन आय गतिविधि, सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य पुनरुद्धार के मुख्य मुद्दे, प्रभावी फसल बीमा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे के साथ उचित जोखिम प्रबंधन।

25 वर्षो में 35 हजार किसानों ने की आत्महत्या

तिवारी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में करीब 35,000 से अधिक किसानों, जिनमें कई महिलाएं शामिल हैं, ने आत्महत्या का सहारा लिया है क्योंकि वे कर्ज का बोझ नहीं उठा सकते थे। राज्यभर में खुदकुशी करने वाले किसान बड़ी संख्या में निराश्रित विधवाओं और अनाथों को पीछे छोड गए हैं।

5 लाख करोड़ खर्च करने से भी नहीं बनी बात

किसान नेता तिवारी ने 'दैनिक भास्कर' कहा  कि किसान आत्महत्या रोकने सरकार पिछले 10 सालों में 5 लाख करोड़ खर्च कर चुकी है। इसके बावजूद किसान आत्महत्या की घटनाएं नहीं रुकी। राज्य की फडणवीस सरकार ने किसान आत्महत्या रोकने के लिए वसंतराव नायक शेती स्वावलंबन मिशन गठित किया पर न कोई निधि दी गई और न कोई अधिकार। मिशन की सिफारिशों को भी अधिकारी कोई तवज्जो नहीं देते।

 

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