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जहां बैठा टिड्डी दल, वहां पेड़ों की पत्तियोंं को कर गया चट, मौके पर पहुँचे अधिकारी

जहां बैठा टिड्डी दल, वहां पेड़ों की पत्तियोंं को कर गया चट, मौके पर पहुँचे अधिकारी


डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा/झिरपा/अमरवाड़ा। पांढुर्ना से चार दिन पहले विदा हुए टिड्डी दल को लेकर बेफिक्र किसान एक बार फिर मुसीबत में पड़ गए हैं। शनिवार को अमरवाड़ा के हरनभटा और सेजा गांव के आसपास एक दल ने डेरा डाला तो रविवार की सुबह होशंगाबाद जिले की सीमा से लगे झिरपा में दूसरे दल ने आमद दे दी। रविवार को दोनों जगह प्रशासन और स्थानीय लोगों ने शाम तक दल को खदेडऩे में सफलता हासिल की।
 झिरपा के गांव खंचारी में एक छोटा टिड्डियों का दल होशंगाबाद जिले के मटकुली क्षेत्र की ओर से आया। जिस झाड़ी और पौधों पर टिड्डियां बैठी, उसे कुछ देरे में ही चौपट कर आगे बढ़ गई। अधिकांश खेत खाली होने से उसका प्रकोप कम रहा है। ग्रामीणों की सूचना स्थानीय पंचायत, प्रशासन, कृषि और वन विभाग को दी। स्थानीय निवासी परसू ठाकुर, रमेश राय, श्याम कुमार राय कहते हैं कि आसमान में टिड्डियां दिनभर उड़ती नजर आती रही, किन्तु आबादी क्षेत्र में इसका कोई विशेष फर्क नजर नहीं आया। एसडीओ कृषि प्रमोद उट्टी ने बताया कि टिड्डी दल हवाओं की दिशा के अनुरूप आगे बढ़ता है। तामिया के लोटिया छिंदी क्षेत्र में टिड्डियों के आने के अंदेशा से दवाईयों का छिड़काव करने टीम जुटी हुई है। झिरपा क्षेत्र में छोटा दल है, जिससे विशेष नुकसान की आशंका नहीं है। फिर भी आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं।
सुबह 4 बजे से शुरू हुआ छिड़काव
शनिवार की दोपहर बाद अमरवाड़ा के हरनभटा और सेजा में आए दल का खात्मा करने कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने शनिवार देर रात तक कीटनाशकों का छिड़काव किया। रविवार सुबह 4 बजे से राहत दल ने फिर से छिड़काव किया। यहां लाखों की संख्या में मृत टिड्डी पेड़ के नीचे और खेतों में गिरे हुए हैं। यहां किसानों ने सुबह से ही खेतों में थाली बर्तन और अन्य सामान से शोर मचाना शुरू किया तो टिड्डी दल भागने लगे। जुंगावानी, बिछुआ, महुआखेड़ा, गाडरवारा, जिलहरी, सकरवाड़ा होते हुए दल हर्रई की ओर बढ़ गया। एसडीएम एमआर धुर्वे ने बताया कि फायर ब्रिगेड से टिड्डियों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। उप संचालक कृषि जेआर हेड़ाऊ के साथ एक दर्जन से अधिकारी कर्मचारी की टीम ने रविवार की सुबह सूर्य निकलने से पहले ही गांवों में छिड़काव शुरू कराया। इससे टिड्डियों की संख्या कम हो गई है।  
देर शाम सिवनी की ओर से आया एक दल
लगभग 24 घंटे से टिड्डियों से जूझ रहे अधिकारी उस वक्त हैरान हो गए जब रविवार को दोपहर बाद सिवनी की ओर से टिड्डियों का एक दूसरा दल अमरवाड़ा के आसपास पहुंच गया। इस दल को ग्रामीणों ने खदेड़ा तो यह दल तीन हिस्सों में बंट गया। एक दल हरनभटा के दल के साथ बिछुआ में शामिल हो गया यहां टिड्डी दल सुरलाखापा की ओर बढ़ गया। दूसरा हिस्सा में जंगल की ओर तो तीसरा हिस्सा अमरवाड़ा से चौरई मार्ग पर बसे गांवो की ओर बढ़ गया। इन गांवों मेंं रविवार देर रात तक कीटनाशक का छिड़काव जारी था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।