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नरसिंहपुर: नरसिंहपुर में ठेका रहते कंपनी ने खनिज विभाग के पोर्टल में छेडखानी कर किया गोलमाल

September 23rd, 2022

डिजिटल डेस्क, नरसिंहपुर। जिले की रेत खदानों का दो साल तक ठेका चलाने वाली घनलक्ष्मी मचेंर्डाइस द्वारा खनिज विभाग के पोर्टल मेें छेडख़ानी कर बड़ा गोलमाल किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। प्रमुख सचिव खनिज सुखबीर सिंह तक पहुंची शिकायत के अनुसार धनलक्ष्मी द्वारा एक डंपर से एक ट्रिप रेत के लिए साढ़े 11 हजार घनमीटर की ईटीपी हासिल कर ली गई। इसी तरह से मनमर्जी की ईटीपी जनरेट कर इसके द्वारा करीब दस करोड़ रूपए का रेत घोटाला किया गया। शिकायत पर जांच बैठा दी गई है।

खनिज विभाग के अवर सचिव प्रकाश पंद्रे ने 3 सदस्यीय जांच दल गठित करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। जांच दल में खनिज विभाग के क्षेत्रीय प्रमुख (जबलपुर) संतोष पटले, प्रदीप तिवारी खनिज अधिकारी जबलपुर तथा पी.पी. राय खनिज अधिकारी (संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म ) भोपाल को शामिल किया गया है। 

दो दिन में खदानों से निकाली 76 प्रतिशत रेत

आरटीआई एक्टिविस्ट रमाकांत कौरव (करेली) ने खनिज निगम से आरटीआई के तहत जो दस्तावेज हासिल किए उनसे यह गोलमाल सामने आया। दस्तावेजों के अनुसार धनलक्ष्मी कंपनी द्वारा  ईटीपी जनरेट कर केवल 7 दिन में (24 से 30 जून 2020 तक) लगभग 3 लाख घन मीटर रेत का खनन और परिवहन कर स्टॉक बना लिया गया। केवल 9 घनमीटर रेत लोडिंग की क्षमता के डंपर से एक ट्रिप में 11,502 घनमीटर रेत ले जाना भी बताया गया। यही नहीं साढ़े तीन घन मीटर की क्षमता वाली ट्रैक्टर ट्रॉली में 60-60 घनमीटर रेत ले जाना दर्शाया गया।

इसके द्वारा एक-एक खदान से महज एक-दो दिन भीतर खदान की पूरे साल के लिए स्वीकृत कुल रेत की मात्रा में से 76 प्रतिशत तक रेत निकालना भी दर्शाया गया। व्यवहारिक रूप से असंभव काम को देख खनिज विभाग के आला अफसर भी हैरत में पड़े हैं। 

कंपनी पर यह आरोप भी 

धनलक्ष्मी द्वारा वर्ष 2020 के रैनी सीजन के जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में जबकि रेत के उत्खनन पर रोक रहती है, तीन लाख 14 हजार 230 घन मीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया। अवैध रेत के परिवहन के लिए वाहनों को धनलक्ष्मी कंपनी द्वारा दिखाए गए फर्जी स्टॉक से ईटीपी जारी किए जाने का भी आरोप हैे। रायल्टी दर 315 रुपए घनमीटर के हिसाब से रेत का ठेका धनलक्ष्मी कम्पनी को मिला था। इस दर से 3,14,230 घनमीटर रेत लगभग 10 करोड़ रुपए की होती है। जिले की ठेका कंपनी द्वारा किए गए इस गोलमाल में तत्कालीन कलेक्टर की भूमिका पर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। 

यह है अंदर की बात

धनलक्ष्मी मर्चेंडाइस को जिले की 36 खदानें सालाना 20 लाख घनमीटर रेत खनन के लिए सौंपी गई थीं। इसके द्वारा अपने 2 साल (जून 2020 से जून 2022) के खनन कार्यकाल दैारान केवल 20 खदानों की पर्यावरणीय व अन्य स्वीकृतियां प्राप्त की गईं। इसके द्वारा जून 2020 में काम शुरू किया गया और पहले ही महीने में 3 लाख 14 हजार 230 घनमीटर रेत का भंडारण करना बता दिया गया। माइनिंग के जानकारों के अनुसार ठेके के पहले ही महीने इतना भंडारण कर पाना बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए संभव नहीं है।

सूत्रों के अनुसार कंपनी द्वारा बताया गया यह आंकड़ा और स्टॉक कागजी था। हकीकत में उसने जुलाई 2020 से सितंबर 2020 के दरम्यान जबकि रेत खनन पर प्रतिबंध रहता है नदियों से रेत निकाली। और कागजी स्टॉक की ईटीपी जारी कर वह अवैध रूप से खनन की गई रेत को बाजार में खपाती रही। इसके द्वारा वाहनों की लोडिंग क्षमता से कई गुना बढ़ा कर ईटीपी काटे जाने की बात भी दस्तावेजों में दर्ज है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन सहित खनिज महकमे के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध रूप में सामने आई है।