दैनिक भास्कर हिंदी: महाराष्ट्र-तेलंगाना के बीच आसान होगा वन्यजीवों का आदान-प्रदान

December 8th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अब महाराष्ट्र व तेलंगाना राज्य में वन्यजीवों का आदान-प्रदान आसानी से हो सकेगा। हाल ही में महाराष्ट्र स्टेट जू अथॉरिटी के अधिकारियों ने तेलंगाना के हैदराबाद स्थित जू में विजिट कर यहां के व्यवस्थापन को समझा है। साथ ही भविष्य में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने को लेकर समझौता भी किया है। इससे पहले भी यह प्रक्रिया मुमकिन थी, लेकिन अब आपसी मेल-जोल के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। महाराष्ट्र राज्य प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण की ओर से हाल ही में संग्रहालय के संचालक व पशु चिकित्सा अधिकारियों का हैदराबाद स्थित नेहरू जूलॉजिकल पार्क एंड जू का दौरा कराया गया है। यह दौरा प्रशिक्षण के उद्देश्य से किया गया है। 380 एकड़ में फैले उपरोक्त पार्क एंड जू का यहां के अधिकारियों ने जायजा लिया और जू व्यवस्थापन के गुर भी सीखे। दोनों राज्यों की जू अथॉरिटी का एक-दूसरे के अच्छे संबंध बनने से भविष्य में  महाराष्ट्र राज्य में बने जू व हैदराबाद स्थित जू से वन्यजीवों का आदान-प्रदान आसानी से हो सकता है। देश में 10 स्टेट जू अथॉरिटी हैं। इसमें महाराष्ट्र राज्य की जू अथॉरिटी शामिल है। महाराष्ट्र राज्य में कुल 9 जू एंड पार्क हैं। जिसमें नागपुर का महाराजबाग चिड़ियाघर, औरंगाबाद का सिद्धार्थ उद्यान एंड जू, सोलापुर का महात्मा गांधी राष्ट्रीय उद्यान, कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति जू, पुणे का राजीव गांधी जलॉजिकल पार्क, मुंबई का बोरिवली नेशनल पार्क एंड जू आदि शामिल है। इन जू में एशियाई लॉयन से लेकर बाघ, तेंदुए, भालू आदि वन्यजीव बड़ी संख्या में हैं, लेकिन स्टेट के जू की बात करें तो यहां शेर, बाघ की संख्या कम है। हालांकि, शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में जरूरत के अनुसार स्टेट जू और  हैदराबाद जू के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान आसानी से किया जा सकेगा। वर्तमान में भी वन्यजीवों का आदान-प्रदान होता है, लेकिन वह राज्य अंतर्गत ही होता है। अब यह आदान-प्रदान राज्य तक ही सीमित नहीं रहेगा। राज्य के जू में वन्यजीवों की कमी को दूसरे राज्य से वन्यजीवों लाकर जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। 

हैदराबाद का व्यवस्थापन अपनाएंगे 

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि, हैदराबाद का जू 380 एकड़ में फैला हु आ है। जहां पिंजरों में कैद वन्यजीवों के साथ सफारी भी उपलब्ध है, लेकिन यहां वन्यजीवों को लगने वाले खान-पान की चीजें बहुत कम बाहर से मंगवाई जाती हैं। ज्यादातर खान-पान की चीजों को जू मंे ही तैयार किया जाता है। इसमें हाथियों के लिए गन्ना, हिरण के लिए घास, शाकाहारी वन्यजीवों के लिए सब्जी, फल आदि शामिल है। इसी तरह यहां भी व्यवस्था उपलब्ध करने को लेकर सोच-विचार चल रहा है।
 

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