विधान परिषद से 8 सदस्यों की हुई विदाई : रामदास कदम बोले - बाला साहेब की आत्मा को दुखी करने वाला काम नहीं करुंगा

December 27th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विधान परिषद में शिवसेना के सदस्य रामदास कदम ने दावा किया है कि वह पार्टी से नाराज नहीं हैं। कदम ने कहा कि मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे कि शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहब ठाकरे की आत्मा दुखी होगी। उन्होंने कहा कि मैं खुद को भाग्यवान समझता हूं कि मुझे बालासाहब के सानिध्य में काम करने का मौका मिला है। विधान परिषद के आठ सदस्यों का कार्यकाल 1 जनवरी को खत्म होने वाला है। सोमवार को सदन में इन आठ सदस्यों को विदाई दी गई। इस दौरान कदम ने कहा कि मैं पार्टी से नाराज नहीं हूं। मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। कभी- कभी परिवार में बर्तन से बर्तन टकराते हैं लेकिन उसका गलत मतलब निकालने की आवश्यकता नहीं है। 

मैंने नहीं मांगा था विधान परिषद टिकटः गिरीष व्यास

जबकि भाजपा सदस्य गिरीश व्यास ने कहा कि मैंने पार्टी से विधानसभा के लिए कई बार टिकट मांगा था लेकिन किन्हीं कारणों से टिकट नहीं मिला था। लेकिन साल 2016 में पार्टी ने मुझे अप्रत्याशित रूप से विधान परिषद का टिकट दिया। जबकि मैंने विधान परिषद  टिकट की मांग भी नहीं की थी। लेकिन केंद्रीय परिवहन मंत्री नितीन गडकरी के कारण यह संभव हो सका। इस दौरान सदन में सभापति रामराजे नाईक-निंबालकर ने कहा कि शिवसेना सदस्य गोपीकिशन बाजोरिया ने मुझसे बातचीत के दौरान विश्वास जताया है कि वह साल भर के भीतर सदन में दोबारा लौटेंगे। इसलिए मुझे उम्मीद है कि वह सदन में कुछ अवधि के बाद एक बार फिर से नजर आएंगे। जबकि उपसभापति नीलम गोर्हे ने कहा कि बाजोरिया के सदन में न रहने से विदर्भ में शिवसेना को उनकी कमी खलेगी।

इन सदस्यों को दी गई विदाई

सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में शिवसेना के रामदास कदम, भाजपा के अमरिश पटेल, कांग्रेस के गृह राज्य मंत्री सतेज पाटील, कांग्रेस भाई जगताप, भाजपा के गिरीश  व्यास, शिवसेना के गोपिकिशन बाजोरिया, राकांपा के अरुणकाका जगताप, भाजपा के प्रशांत परिचारक का समावेश है। इसमें से कांग्रेस सदस्य सतेज पाटील, भाजपा सदस्य पटेल दोबारा निर्वाचित हो चुके हैं।

सामने आया कदम और परब का मतभेद

विधान परिषद में शिवसेना सदस्य रामदास कदम और प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब के बीच जारी मतभेद एक बार फिर सामने आया है। सोमवार को विधान परिषद में सभापति रामराजे नाईक-निंबालकर के साथ सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों ने विधानमंडल के प्रवेश द्वार पर तस्वीर खींचवाई। इस मौके पर मंत्री परब मौजूद थे लेकिन शिवसेना सदस्य कदम नहीं आए। वहीं परब संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सदन में विदाई कार्यक्रम में भाषण नहीं दिया।  कांग्रेस सदस्य भाई जगताप भी सदन में ही नहीं आए थे।

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