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जिला परिषद चुनाव की गतिविधियां तेज, जनवरी में कराने के संकेत

जिला परिषद चुनाव की गतिविधियां तेज, जनवरी में कराने के संकेत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधानसभा चुनाव समाप्त होने पर अब जिला परिषद चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं। 24 अक्टूबर को राज्य निर्वाचन आयोग ने 30 अक्टूबर तक सर्कल रचना तथा आरक्षण निश्चित करने का आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त महीने में चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग को दो महीने की कालावधि दी थी। 27 अक्टूबर को यह कालावधि समाप्त हो रही है। 4 अक्टूबर-2019 को विधानसभा चुनाव के िलए अंतिम मतदाता सूची जारी की गई है। आगामी महानगरपालिक, जिला परिषद, पंचायत समिति, नगर परिषद तथा ग्राम पंचायत चुनाव में इसे लागू करने की निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी की है। राज्य में दिसंबर, जनवरी महीने में स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव होने जा रहे हैं। इसी के साथ जनवरी में नागपुर जिला परिषद के चुनाव कराने के संकेत मिले हैं।

18 जुलाई से जिप में प्रशासक राज

जिला परिषद बर्खास्त कर जिला परिषद में 18 जुलाई को प्रशासक नियुक्त किया गया। जिला परिषद में सीईओ और पंचायत समिति में गटविकास अधिकारी को बतौर प्रशासक संपूर्ण अधिकार दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाने पर राज्य सरकार ने जिला परिषद बर्खास्त कर प्रशासक िनयुक्त किया है।

21 मार्च-2017 को कार्यकाल समाप्त

फरवरी-2012 में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव हुए थे। 21 मार्च-2017 को नागपुर जिला परिषद का कार्यकाल समाप्त हो गया। निर्वाचन आयोग की ओर से नए चुनाव की घोषणा भी की गई थी। जिला परिषद चुनाव से पहले पारशिवनी और वानाडोंगरी को नगर परिषद और नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। जिला परिषद चुनाव की प्रभाग रचना में इन दोनों क्षेत्रों को शामिल किए जाने पर इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायालय ने याचिका दायर कर जिला परिषद चुनाव पर ‘स्टे’ दिया। आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाए जाने के मामले को लेकर दूसरी याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने पारशिवनी और वानाडोंगरी को जिला परिषद चुनाव क्षेत्र से हटाकर नई प्रभाग रचना कर चुनाव का रास्ता साफ कर दिया, लेकिन महिला आरक्षण को लेकर पेंच फंसा रहा। इस संबंध में राज्य सरकार को नियम में संशोधन कर जवाब देने के लिए समय दिया गया। राज्य सरकार की ओर से जवाब नहीं मिलने पर िनर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।

और फिर यह हुआ

अदालत के निर्णय पर निर्वाचन आयोग ने दोबारा प्रभाग रचना और आरक्षण की घोषणा की। नियम में संशोधन नहीं किए जाने से नई आरक्षण प्रक्रिया में महिला आरक्षण फिर 50 प्रतिशत के पार चला गया। इसे पुन: न्यायालय में चुनौती दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने नंदूरबार जिला परिषद की याचिका पर कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर सरकार को फटकार लगाई। तत्काल जिला परिषद बर्खास्त कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का आधार लेकर ग्राम विकास विभाग ने न्यायालयीन प्रक्रिया में फंसी पांचों जिला परिषद और उनके अधीनस्थ पंचायत समितियां बर्खास्त कर प्रशासक नियुक्त कर दिए। इसी के साथ दो महीने में चुनाव कराने के आदेश दिए। 

अब चुनाव की तैयारी

निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को विधानसभा चुनाव के लिए जारी की मतदाता सूची के आधार पर सर्कल रचना और आरक्षण तय करने के निर्देश दिए हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन जिला परिषद चुनाव की तैयारी में जुट गया है। 

आरक्षण पर इच्छुकाें की नजर

निर्वाचन आयोग से जिला परिषद चुनाव कराने के संकेत मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। आरक्षण का पेंच दूर करने के लिए 31 जुलाई को राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया है। पिछड़े वर्ग की जनसंख्या की जानकारी नहीं जुटा पाने पर सुप्रीम कोर्ट पूर्ववत आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने के आदेश दे चुका है। आरक्षण पुन: निश्चित होगा या पुराने आरक्षण के आधार पर चुनाव होगा, इस ओर चुनाव लड़ने के लिए इच्छुकों की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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