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Panna News: धान खरीदी में बड़ा खेल, शॉर्टेज के नाम पर करोड़ों का घोटाला

Panna News: रैपुरा क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में शॉर्टेज के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में संचालित छह खरीदी केंद्रों में से पांच केंद्रों में लगभग दो करोड़ रुपये की धान शॉर्टेज दिखाई गई है। हैरानी की बात यह है कि यह शॉर्टेज कागजों में दिखाई गई है जिससे शासन को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं पूरे जिले में धान शॉर्टेज का आंकड़ा लगभग दस करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा है। सहकारिता विभाग ने समिति प्रबंधकों को नोटिस भी जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार कृषि साख सहकारी समिति फतेहपुर द्वारा रैपुरा और बघवार खरीदी केंद्र तथा कृषि साख सहकारी समिति बगरौड़ द्वारा मनगवां खरीदी केंद्र सहित मलघन के केंद्रों में कुल मिलाकर लगभग १ करोड़ ८५ लाख रुपये की धान शॉर्टेज की आशंका जताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर शॉर्टेज सामने आने के बाद खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शॉर्टेज का खेल कैसे होता है
सूत्रों के अनुसार समितियां किसानों से खरीदी गई धान की मात्रा कागजों में अधिक दर्शाती हैं और उसी आधार पर शासन से भुगतान प्राप्त कर लेती हैं लेकिन वास्तविकता में उतनी धान गोदामों तक पहुंचती ही नहीं। कागजों में खरीदी और गोदाम में जमा धान के बीच का अंतर ही शॉर्टेज कहलाता है। इसी अंतर के नाम पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये का खेल किया जाता है।
हर वर्ष होता है खेल, कार्यवाही सिर्फ कागजों में
यह कोई पहला मामला नहीं है। हर वर्ष धान खरीदी के बाद कई समितियों में शॉर्टेज निकलती है लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी किए जाते हैं और मामले कोर्ट में भेज दिए जाते हैं। कोर्ट में मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं जिससे दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती और वह लगातार इस खेल को दोहराते रहते हैं। जानकारों का कहना है कि बैंक प्रशासन यदि चाहे तो ऐसे मामलों में सीधे पुलिस में एफआईआर दर्ज कराकर आपराधिक प्रकरण बनवा सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।
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जिले में दस करोड़ की शॉर्टेज की चर्चा
सूत्रों के अनुसार पन्ना जिले की कई सहकारी समितियों में धान खरीदी के नाम पर शॉर्टेज दिखाकर लगभग दस करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर हर वर्ष की तरह इस बार भी मामला नोटिस और फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इनका कहना
हमने सहकारी समितियों को नोटिस जारी किए हैं जो एक प्रक्रिया का हिस्सा है कि जो अपने खरीदा उतनी मात्रा में उपज स्वीकृत होना चाहिए। इसलिए हमने नोटिस जारी किए। किस समिति में कितनी शॉर्टेज है यह अभी फाइनल नहीं है। जारी किए गए नोटिस एक अलर्ट है। फाइनल होने पर वसूली की प्रक्रिया की जाएगी।
एस.के. कन्नौजिया
महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक पन्ना
Created On :   25 March 2026 4:45 PM IST














