Panna News: रैपुरा में 4.67 करोड़ की सीसी सडक़ निर्माण पर सवाल, नाली के गंदे पानी से कंक्रीट बनाने का वीडियो वायरल

रैपुरा में 4.67 करोड़ की सीसी सडक़ निर्माण पर सवाल, नाली के गंदे पानी से कंक्रीट बनाने का वीडियो वायरल
कस्बे के अवंतीबाई चौक से लगभग 800 मीटर मुख्य जिला मार्ग पर लगभग 4.67 करोड़ रुपए की लागत से सीसी सडक़ का निर्माण कार्य किया जा रहा है लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Panna News: कस्बे के अवंतीबाई चौक से लगभग 800 मीटर मुख्य जिला मार्ग पर लगभग 4.67 करोड़ रुपए की लागत से सीसी सडक़ का निर्माण कार्य किया जा रहा है लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें निर्माण कार्य के दौरान मिक्सचर मशीन में नाली के गंदे पानी का उपयोग कर कंक्रीट तैयार किया जाता दिखाई दे रहा है। यदि वायरल वीडियो वास्तविक हैं तो यह मामला निर्माण मानकों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा हो सकता है। निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे लोक निर्माण विभाग पन्ना के अधिकारियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

निर्माण मानकों के लिए क्या कहते हैं नियम

निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले पानी को लेकर भारतीय मानक स्पष्ट हैं। ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैण्डर्ड के द्वारा जारी 456:2000 के अनुसार कंक्रीट निर्माण में उपयोग होने वाला पानी साफ, स्वच्छ और पीने योग्य गुणवत्ता का होना चाहिए। किसी भी प्रकार का गंदा, सीवर, नाली या रासायनिक तत्वों वाला पानी कंक्रीट निर्माण में उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे कंक्रीट की मजबूती और गुणवत्ता प्रभावित होती है। इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार गंदे पानी से बने कंक्रीट की मजबूती कम हो जाती है। सडक़ में जल्दी दरारें पड़ सकती हैं, सतह उखड़ सकती है। सडक़ की उम्र कम हो जाती है।

ठेका शर्तों का भी है उल्लंघन

सरकारी निर्माण कार्यों में ठेकेदार और विभाग के बीच अनुबंध में स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि निर्माण कार्य मानक गुणवत्ता और स्वच्छ सामग्री से किया जाएगा। यदि निर्माण में मानक के विपरीत सामग्री या पानी का उपयोग किया जाता है तो इससे ठेका शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है।

अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल

इतनी बड़ी लागत के निर्माण कार्य में विभागीय इंजीनियर, सब इंजीनियर और गुणवत्ता नियंत्रण की निगरानी रहती है। इसके बावजूद यदि नाली के पानी से कंक्रीट बनाए जाने जैसे आरोप सामने आ रहे हैं तो यह मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और कंक्रीटी की सैंपल टेस्टिंग कराई जाए ताकि सडक़ की वास्तविक गुणवत्ता सामने आ सके। अब देखना यह होगा कि विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराता है या नहीं।

इनका कहना है

अगर ऐसा है तो गलत है पहले बोर से पानी ले जा रहे थे। मैं बात करता हूं कि ऐसा क्यों हैं।

आर.एम. बागरी, एसडीओ लोक निर्माण विभाग

Created On :   26 March 2026 1:50 PM IST

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