Panna News: धरवारा की बदलती तस्वीर, जब एक गाँव ने ठाना पानी को अपना भविष्य माना

धरवारा की बदलती तस्वीर, जब एक गाँव ने ठाना पानी को अपना भविष्य माना
बुंदेलखंड की धरती जो अक्सर पानी की बूंद-बूंद के संघर्ष के लिए जानी जाती है वहीं पन्ना जिले के पवई ब्लॉक का धरवारा गाँव आज एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।

Panna News: बुंदेलखंड की धरती जो अक्सर पानी की बूंद-बूंद के संघर्ष के लिए जानी जाती है वहीं पन्ना जिले के पवई ब्लॉक का धरवारा गाँव आज एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। विश्व जल दिवस के मौके पर यहाँ के ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया कि अगर संकल्प शक्ति और सामूहिक प्रयास हो तो प्रकृति का संरक्षण और जल संकट का समाधान नामुमकिन नहीं है।

श्रमदान से सृजन, नारों से आगे बढक़र काम

अक्सर दिवस विशेष पर केवल भाषण और रस्म अदायगी होती है लेकिन धरवारा में दृश्य कुछ अलग था। एलआईसी एचएफएल परियोजना के सहयोग और लोक कल्याण भूमिका समिति की अध्यक्ष सुश्री रेखा कुशवाहा के मार्गदर्शन में बन रहे स्टॉप डेम के लिए ग्रामीणों ने स्वयं फावड़ा और तगाड़ी उठाई। पुरुष हों या महिलाएँ सभी ने एकजुट होकर सामूहिक श्रमदान किया। यह केवल पत्थर और मिट्टी का ढांचा नहीं खड़ा करना था बल्कि अपनी आने वाली पीढिय़ों के लिए खुशहाली की नींव रखना था।

जल ही जीवन, संकल्प से सिद्धि तक

कार्यक्रम के दौरान केवल पसीना ही नहीं बहाया गया बल्कि एक गूँज भी सुनाई दी जल संरक्षण की शपथ। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वह पानी की बर्बादी रोकेंगे और हर बूंद का मोल समझेंगे। स्टॉप डेम बनने से वर्षा जल रुकेगा जिससे कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर बढ़ेगा। कृषि प्रधान इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढऩे से किसानों की आय और फसल चक्र में सुधार होगा। सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के उत्साह को दोगुना कर दिया।

विशेषज्ञों की राय, छोटे कदम बड़ी तब्दीली

समिति के प्रतिनिधि आशीष वर्मा और उनकी टीम अजय शंकर व सीआरपी पाल ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण अब केवल जरूरत नहीं बल्कि अस्तित्व की शर्त है। उनके अनुसार धरवारा का यह मॉडल अन्य गाँवों के लिए भी एक नजीर पेश करता है कि कैसे बाहरी सहयोग और स्थानीय भागीदारी से विकास की गति को बदला जा सकता है।


Created On :   23 March 2026 1:47 PM IST

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