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Pune News: तलेगांव एमआईडीसी में बन रहा मिनी कोरिया, कोरियन नागरिकों ने खोले कैफे-किराना स्टोर

- कोरियन भाषा और संस्कृति सीखने का केंद्र
- हांगजिक का गेस्ट हाउस-घर जैसा एहसास
- भारत और कोरिया में सांस्कृतिक समानताएं
Pune News. श्रीपाद शिंदे। तलेगांव, चाकण और शिक्रापुर एमआईडीसी में कई कोरियन कंपनियां कार्यरत हैं। हुंडई और पोस्को जैसी बड़ी कंपनियों के कारण तलेगांव एमआईडीसी में कोरियन नागरिकों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। अब इन नागरिकों के लिए यहां कोरियन गेस्ट हाउस, कैफे और किराना स्टोर भी खुल गए हैं, जिससे यह क्षेत्र धीरे-धीरे 'मिनी कोरिया' का रूप ले रहा है। माना जा रहा है कि, इस क्षेत्र में एक हजार से अधिक कोरियन नागरिकों रह रहे हैं, हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के पास केवल 130 कोरियन नागरिकों की ही आधिकारिक जानकारी है। बताया जाता है कि, अन्य कोरियन नागरिक बिजनेस वीजा, टूरिस्ट वीसा पर आकर कुछ दिन बाद चले जाते हैं और उनके स्थान पर अन्य कोरियाई आ जाते हैं।
हांगजिक का गेस्ट हाउस-घर जैसा एहसास
चो हांगजिक का आंबी स्थित एक्जर्बिया सोसाइटी में एक गेस्ट हाउस है। उनका दूसरा गेस्ट हाउस चेन्नई में भी है। तलेगांव स्थित गेस्ट हाउस में फिलहाल 25 कोरियन नागरिक रह रहे हैं, जो सभी तलेगांव और चाकण एमआईडीसी की कंपनियों में काम करते हैं। हांगजिक अपने गेस्ट हाउस के रेस्तरां के लिए कई चीजें सीधे कोरिया से मंगवाते हैं, क्योंकि कोरियन लोगों को भारतीय मसालेदार खाना पसंद नहीं आता। हालांकि, हा युन नामक एक युवा को भारतीय मसालेदार व्यंजन पसंद आने लगे हैं और वह अक्सर महाराष्ट्रीयन ढाबों पर जाकर खाना खाते हैं।
भाषा और संस्कृति का संगम
हांगजिक ने कोरियन और भारतीय नागरिकों के बीच संवाद के लिए दुभाषिए को नियुक्त किया है। नेपाल के शिवराम इस गेस्ट हाउस में सुपरवाइजर और दुभाषिए के रूप में काम करते हैं। वे कोरियन नागरिकों के लिए स्थानीय बाजार से जरूरी सामान भी लाते हैं। शिवराम बताते हैं कि कोरियन लोग काम के बाद बाहर कम ही घूमते हैं और छुट्टी के दिनों में भी घर पर ही रहना पसंद करते हैं।
भारत और कोरिया में सांस्कृतिक समानताएं
हा युन बताते हैं कि भारत का गणेशोत्सव और कोरिया का 'चुसिओक' त्योहार एक ही समय पर आते हैं, इसलिए वे इन्हें एक साथ मनाते हैं। उन्हें पुणे का गणेशोत्सव भी पसंद है और वे यहां के पर्यटन स्थलों का भी लुत्फ उठाते हैं। युन कहते हैं कि दोनों देशों की सामूहिक जीवनशैली है, जहां व्यक्ति से ज्यादा समाज या समूह को प्राथमिकता दी जाती है। परिवार और बड़ों का सम्मान करना, जिसे कोरियन संस्कृति में 'जुनेरिम' कहा जाता है, जैसी बातें दोनों देशों में समान रूप से दिखती हैं।
कोरियन भाषा और संस्कृति सीखने का केंद्र
कोरिया के सांस्कृतिक और पर्यटन मंत्रालय के तहत बालेवाड़ी में इंडो-कोरियन सेंटर की स्थापना की गई है। यह सेंटर भारतीय नागरिकों को कोरियन भाषा, परंपरा और खान-पान से परिचित कराता है। यहां कोरिया में नौकरी और व्यवसाय के कई अवसर उपलब्ध हैं, जिसके लिए युवा कोरियन भाषा सीखकर वहां जा रहे हैं। कोरिया जाने के लिए 'टॉपिक' नामक एक परीक्षा पास करनी होती है, जिसे आयोजित करने की मान्यता बालेवाडी स्थित इंडो-कोरियन सेंटर को मिली है। इस सेंटर की निदेशक डॉ. एउन्जु लिम हैं, जो 23 साल पहले कथक सीखने भारत आई थीं और यहीं बस गईं।
सो योन, जो तलेगांव के एक कोरियन रेस्तरां में काम करती हैं, बताती हैं कि गौतम बुद्ध को भारत में ज्ञान प्राप्त हुआ और उनका महापरिनिर्वाण भी यहीं हुआ, इसलिए दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों को भारत से गहरा लगाव है। वह कहती हैं कि कोरियाई संस्कृति पर भी बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव है। सो योन ने बताया कि दोनों देशों में पारंपरिक पोशाकों का विशेष महत्व है। भारत की साड़ी और धोती और कोरिया का 'हैनबोक' विशेष अवसरों पर पहने जाते हैं।
कोरियन भाषा : रोजगार का नया जरिया
भारत में कई कोरियन कंपनियां हैं और कोरिया में नौकरी के लिए कोरियन भाषा सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र के कई युवा बालेवाड़ी के इंडो-कोरियन सेंटर में भाषा सीखने आते हैं। कोरिया एक मजबूत अर्थव्यवस्था है और वहां दुनिया की कई बड़ी कंपनियां हैं। कोरियन भाषा जानने वाले कई लोग अब भारत में रहकर ही कोरियन कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा, कोरिया के कई विश्वविद्यालय भाषा जानने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति भी देते हैं।
ग्रोसरी स्टोर से मिलती है राहत
अब तलेगांव दाभाड़े में कोरियन नागरिकों के लिए उनके देश की ग्रोसरी और खाने-पीने की चीजें उपलब्ध हैं। तलेगांव एमआईडीसी में सबसे ज्यादा कोरियन नागरिकों के रहने के कारण इन दुकानों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इससे कोरियन लोगों को भारतीय खाद्य संस्कृति पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता और वे अपने देश के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले पाते हैं। कोरियन कंपनी सीजे मार्ट की शॉप चेन भारत में सी पलनी चलाते है। भारत में कहीं भी कोरिया से ग्रोसरी का सामान मंगाना हो तो पहले वह चेन्नई में आता है, वहां से पूरे भारत में बने सीजे मार्ट के स्टोर में भेजा जाता है।
Created On :   31 Aug 2025 8:13 PM IST