Rewa news: बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने वाले बाल श्रम केंद्र बंद

बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने वाले बाल श्रम केंद्र बंद
परियोजना कार्यालय में लटका ताला

डिजिटल न्यूज़ रीवा

श्रम मंत्रालय भारत सरकार के अधीन जिले में संचालित बाल श्रम केंद्रों के संचालन के लिए संचालित बाल श्रम परियोजना करीब 4 वर्ष से बंद हो चुकी है। केंद्र स्तर से बजट के अभाव में परियोजना का संचालन कोविड के समय से ही बंद पड़ा हुआ है। परिणाम स्वरूप परियोजना कार्यालय में संविदा पर काम कर रहे अधिकारी कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। बजट न मिलने से उनका वेतन भी नसीब नहीं हो पाया। ऐसे में 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा देने का कार्य भी बंद हो चुका है। कई बार यहां से पत्राचार किए जाने के बावजूद परियोजना शुरू किए जाने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। परिणाम स्वरुप परियोजना कार्यालय तथा अन्य केंद्रों में ताला लटका हुआ है।

नीतिगत निर्णय का परिणाम

बताया गया है कि ज़िले में बाल श्रम परियोजना के संबंध में मुख्य रूप से केंद्र सरकार की नीतिगत बदलावों के चलते ऐसा किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हुए बदलावों के तहत राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना को अब समग्र शिक्षा अभियान के साथ जोड़ दिया गया है। इसके तहत रीवा ज़िले में भी चिन्हित या रेस्क्यू किए गए बाल श्रमिकों को सीधे औपचारिक शिक्षा प्रणाली की मुख्यधारा से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

संचालित किया जा रहे थे 38 बाल श्रम केंद्र

बताया गया है कि बाल श्रम परियोजना के मातहत जिलेभर में 38 केंद्र संचालित थे जिससे क्षेत्र से 14 वर्ष के 1000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था उन्हें शैक्षिक संबंधित तरह-तरह की सुविधा भी दी जा रही थी। लेकिन कोरोना कल के बाद से जिले के लिए केंद्र द्वारा कोई बजट उपलब्ध नहीं कराया गया परिणाम स्वरुप सभी केंद्र बंद हो गए. ऐसे केंद्र एनजीओ के माध्यम से संचालित किए जा रहे थे. बाल श्रम केंद्र के शिक्षक और कर्मचारी भी बेरोजगार हो चुके हैं.

अब प्रशासन के हाथ में गतिविधियां

बाल श्रम केंद्रों के बंद हो जाने के बाद पूरी गतिविधियां प्रशासन की ओर से संचालित हो रही है। लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे। आज भी हजारों की संख्या में बाल श्रमिक कठिन परिश्रम करने को मजबूर हो रहे हैं ।उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा से नहीं जोड़ा जा सका है। सिर्फ दिखावे के लिए ज़िले के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्तमान में ज़िले के लगभग 100 गाँवों में सामाजिक संगठनों के सहयोग से बाल अधिकार संरक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।


Created On :   27 Sept 2026 1:45 PM IST

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