Rewa news: पत्रकार का निरपेक्ष होना संभव ही नहीं : राजेश बादल

पत्रकार का निरपेक्ष होना संभव ही नहीं : राजेश बादल
स्वाधीनता मिलने के बाद कुछ विसंगतियां हुई हैं जिनका ख़ामियाजा देश भुगत रहा है : विजयदत्त श्रीधर

डिजिटल न्यूज़ रीवा

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय रीवा परिसर स्थित लाल बल्देव सिंह सभागार में पं. रामसिया त्रिपाठी स्मृति व्याख्यानमाला एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त आयोजन मे किया गया जिसमें देश के मूर्धन्य पत्रकार और माधवराव सप्रे संग्रहालय भोपाल के संस्थापक और निदेशक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को पत्रकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए पं. रामसिया त्रिपाठी स्मृति सारस्वत सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भारत,भारतीयता और भारत माता विषय पर अपने व्याख्यान में डॉ. विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि स्वाधीनता मिलने के बाद कुछ ऐसी विसंगतियां हुई हैं जिनका ख़ामियाजा देश अभी तक भुगत रहा है। नकारात्मक शब्द "धर्म निरपेक्षता" की जगह "सर्वधर्म समभाव" होना चाहिए था। इसी तरह अल्पसंख्यक कौन है, इसे भी ग़लत परिभाषित किया गया। देश का निर्माण करते समय हमारे वेदों, पुराणों, धार्मिक ग्रंथों से अनेक सूत्र वाक्यों को लिया गया, परन्तु उन सूत्र वाक्यों में निहित भावनाओं का अनुपालन नहीं किया गया।

विशिष्ट वक्ता के रूप में अनेक पुस्तकों के लेखक, पत्रकार और मीडियाकर्मी राजेश बादल ने "मीडिया की सापेक्षता" विषय पर अपने विशिष्ट संबोधन में कहा कि पत्रकार का निरपेक्ष होना संभव ही नहीं है। देश और समाज के हित में पत्रकार को अपनी कलम रोकनी भी पड़ती है। उन्होंने अनेक दृष्टांत देते हुए ऐसी पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल दिया जो देश और कालखंड के प्रभाव को झेलते हुए अपनी दायित्वपूर्ण स्वायत्तता को बनाए रखे।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल ने कहा कि भारत, भारतीयता और भारतमाता को समझने के लिए हमें अपनी सनातन परंपरा और इतिहास को समझने की आवश्यकता है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.चंद्रिका प्रसाद चंद्र ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वक्ताद्वय के संबोधनों को यथार्थपरक और विचारोत्तेजक बताया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संयोजक योगेश त्रिपाठी ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन रीवा परिसर के निदेशक डॉ. सतेंद्र डहेरिया ने किया। मंच संचालन तनु भदौरिया ने किया। इस अवसर पर भारी संख्या में नगर के बुद्धिजीवी, वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी और विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।

Created On :   27 Sept 2026 2:59 PM IST

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