Rewa news: पीएम पोषण आहार के तहत पांचवे महीने में भी जारी नहीं हो पाई राशि

पीएम पोषण आहार के तहत पांचवे महीने में भी जारी नहीं हो पाई राशि
कर्ज के तले दबते जा रहे स्व-सहायता समूहों के संचालक

डिजिटल न्यूज़ रीवा

प्रधानमंत्री पोषण आहार कार्यक्रम अंतर्गत रीवा और मऊगंज जिले में स्व-सहायता समूहों और रसोइयों को पांचवे महीने में भी राशि जारी नहीं हो पाई है इससे समूह संचालकों के समक्ष गंभीर संकट पैदा हो गया है । विभागीय स्तर से मानदेय एवं कुकिंग कॉस्ट का भुगतान न होना समूह संचालकों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस देरी के कारण मध्याह्न भोजन व्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है। समूह कर्ज के तले दबते जा रहे हैं क्योंकि समूहों को उच्च स्तर से खाद्यान्न का आवंटन तो कराया जा रहा है लेकिन राशि का भुगतान नहीं हो रहा इससे मध्यान भोजन में प्रयोग किया कि जाने वाली सामग्रियों की खरीदी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्कूल के बच्चों के लिए मीनू अनुसार भोजन दिया जाना मुश्किल हो रहा है पूरी व्यवस्था चौपट हो रही है। इसके बावजूद उच्च स्तर से कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा रही।

लगातार बढ़ता जा रहा कर्ज

विभागीय अव्यवस्था से परेशान कुछ समूह संचालकों का कहना है कि एक तो वैसे भी समूहों के लिए राशि काफी कम दी जा रही है. प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के हिसाब से 8 से 10 रुपए के बीच इस महंगाई में राशि जारी की जाती है इसके बावजूद पिछले 5 महीने से राशि आवंटित न किए जाने के चलते किराना सब्जी दुकानों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। स्कूल की व्यवस्था बनाए रखने के लिए किराना दुकानों से उधारी में सामान लेना पड़ रहा है। स्थित तो यह भी हो गई है कि अब किराना दुकानदार सामान देने से सीधे इंकार कर रहे हैं। ऐसे अब स्कूल के बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है. स्थित तो यह है कि अब जहां प्राथमिक स्कूल स्तर के समूहों पर करीब 5 महीने में करीब 40 से50 हजार रुपए के कर्ज का बोझ हो चुका है तो माध्यमिक स्तर के समूहों पर करीब 60 से 70 हजार रुपए का कर्ज हो चुका है। यह कर्ज कैसे चुकता होगा यह भी एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

नहीं हो रही कोई पहल

बताया गया है कि सरकारी स्कूलों में मध्यान भोजन की राशि को लेकर ना तो कोई प्रशासनिक अधिकारी कुछ करने की स्थिति में है और ना ही कोई जनप्रतिनिधि खोज खबर कर रहा है। प्रशासनिक कार्यवाही के डर से समूह संचालक भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। फिर भी उनकी पीड़ा को कोई समझने वाला नहीं है। जबकि यह पूरे प्रदेश स्तर का मामला है।

Created On :   14 Oct 2026 4:27 PM IST

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