Cuba-US Tension: 'अब क्यूबा की बारी..', ईरान जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी, सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने की कही बात

अब क्यूबा की बारी.., ईरान जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी, सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने की कही बात
ईरान के साथ चल रही जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद अब अगला नंबर क्यूबा का है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के साथ चल रही जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद अब अगला नंबर क्यूबा का है। मियामी में आयोजित एक बिजनेस समिट के दौरान ट्रंप ने ये बात कही। हालांकि उन्होंने स्पष्ट तौर पर ये नहीं बताया कि क्यूबा के खिलाफ वह क्या एक्शन लेंगे। लेकिन, माना जा रहा है कि उनका इशारा सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने की तरफ था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'मैंने अमेरिकी सेना को बहुत मजबूत बनाया है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इसका इस्तेमाल करना पड़ेगा, लेकिन कभी-कभी ऐसा करना पड़ता है। वैसे क्यूबा का अगला नंबर है।' हालांकि तुरंत बाद ही उन्होंने ये भी कहा 'ऐसा समझो कि मैंने यह कहा ही नहीं है।'

दिया था 'फ्रेंडली टेकओवर' वाला बयान

इस समय क्यूबा भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। वेनेजुएला से क्रूड ऑयल का एक्सपोर्ट बंद होने के बाद वहां ईधन की भारी कमी हो गई है, जिससे हालात बेहद खराब हो गए हैं। दरअसल, अमेरिका की मदद से हुई कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को हटाया गया, जिससे क्यूबा की बड़ी ऊर्जा सप्लाई कट गई।

वहीं, इस महीने की शुरूआत में ट्रंप कह चुके हैं उन्होंने ‘फ्रेंडली टेकओवर’ (दोस्ती के नाम पर कब्जा) की बात भी की थी। उनका कहना था कि वह सम्मानित होंगे अगर क्यूबा को अपने कंट्रोल में ले लें तो। हालांकि इन सख्त बयानों के बावजूद भी अमेरिका के अधिकारियों ने क्यूबा के शीर्ष नेताओं से बातचीत होने की बात कही है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनल ने भी कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी है।

रोकी तेल सप्लाई

अमेरिका अभी से नहीं बल्कि इस साल की शुरुआत से ही क्यूबा पर प्रेशर बना रहा है। जनवरी से ही उसने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को रोक दिया है। अमेरिका ने दूसरे देशों को तेल न देने की चेतावनी दी है। हाल ही में कोलंबिया से क्यूबा जा रहे ऑयल से भरे टैंकर को अमेरिका कोस्टगार्ड ने रोक लिया था।

अमेरिका के इस एक्शन का क्यूबा पर साफ असर दिखाई दे रहा है। जनवरी से ही वहां तेल की सप्लाई बंद है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो रही है। काला बाजार में पेट्रोल 35 डॉलर प्रति गैलन मिल रहा है। इसके साथ ही बिजली भी कट रही है, पूरे देश में बिजली की किल्लत हो रही है। हालात इतने बुरे हो गए हैं कि दवाईयां और खाना भी कम हो गया है। इन हालात में क्यूबा की सरकार दबाव में है।

अमेरिका और क्यूबा कैसे बने दुश्मन?

जब 1898 में क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ था, तो उसका असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया था। अमेरिका से ही वहां की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था नियंत्रित होती थी। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिका की कंपनियों का दबदबा था। साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर क्यूबा के तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया। इसमें अमेरिका ने ही उसका सपोर्ट किया था।

सत्ता पर काबिज होते ही कास्त्रो ने देश में बड़े बदलाव किए। उसने देश में कम्युनिस्ट नीति लागू की। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को कास्त्रो की सरकार के अपने नियंत्रण में ले लिया।

इसके बाद अमेरिका ने बड़ा एक्शन लेते हुए क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इसका असर क्यूबा की आर्थिक स्थिति पर बुरा पड़ने लगा। इसके जवाब में क्यूबा ने अमेरिका के कट्टर दुश्मन रूस से हाथ मिलाया। इसी कारण से अमेरिका और क्यूबा के संबंध समय के साथ और खराब होते चले गए।

Created On :   28 March 2026 5:47 PM IST

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