दैनिक भास्कर हिंदी: प्रवेश घोटाला मामले में भारतीय-कनाडाई व्यवसायी से शीर्ष पुरस्कार छीना गया

June 13th, 2020

हाईलाइट

  • प्रवेश घोटाला मामले में भारतीय-कनाडाई व्यवसायी से शीर्ष पुरस्कार छीना गया

वैंकूवर, 13 जून (आईएएनएस)। भारतीय-कनाडाई व्यवसायी और पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी डेविड सिद्दू से 2019 के अमेरिकी कॉलेज प्रवेश घोटाला मामले में संलिप्तता की वजह से ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया पुरस्कार छीन लिया गया है।

इस घोटाले में, 50 से अधिक लोगों पर अपने बच्चों को अमेरिका के शीर्ष संस्थानों में भर्ती कराने के लिए रिश्वत देने में लाखों का भुगतान करने का आरोप है।

60 वर्षीय सिख व्यवसायी और इन्वेस्टमेंट बैंकर को मार्च में बोस्टन फेडरल कोर्ट में अपने दो बेटों को अमेरिकी कॉलेजों में दाखिला दिलाने के लिए रिश्वत देने का दोषी पाया।

एफबीआई के अनुसार, सिद्दू ने अपने बड़े बेटे की ओर से मानकीकृत परीक्षण (जिसे सैट कहा जाता है) के लिए घोटाले के मास्टरमाइंड विलियम रिक सिंगर को 100,000 डॉलर का भुगतान किया। इसने उनके बेटे को चैपमैन यूनिवर्सिटी में प्रवेश की सुविधा प्रदान की।

उन्होंने अपने छोटे बेटे को दाखिला दिलाने के लिए भी 100,000 डॉलर का भुगतान किया। उन्होंने अपने बेटों के लिए स्थानीय ब्रिटिश कोलंबियन स्कूल की परीक्षा में लिखने के लिए इंपोस्टरस (कोई दूसरा शख्स होने का ढोंग करना) को भी भुगतान किया।

धोखाधड़ी मामले में सिद्दू को अभी सजा होना बाकी है। कथित तौर पर अमेरिकी वकील के साथ 90 दिनों की जेल और 250,000 डॉलर के जुमार्ने का सामना करने के लिए एक दलील सौदे पर पहुंचे हैं।

उनकी सजा के बारे में सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वालों के लिए कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।

इस आदेश के साथ, सिद्दू ऐसे पहले व्यक्ति बन गए हैं, जिनसे यह पुरस्कार छीना गया है। उन्हें पुरस्कार के प्रतीक चिन्ह को तुरंत वापस करने का आदेश दिया गया है।

एक प्रतिष्ठित फुटबॉल खिलाड़ी सिद्दू कनाडाई फुटबॉल लीग में प्रवेश करने वाले पहले भारती-कनाडाई थे। बाद में, उन्हें ब्रिटिश कोलंबिया फुटबॉल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।

उनकी उपलब्धियों के सम्मान में उनके पूर्व कॉलेज वैंकूवर में ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने एक स्टेडियम का नाम डेविड सिद्दू फील्ड रख दिया था। लेकिन धोखाधड़ी के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद मार्च में उनका नाम स्टेडियम से हटा दिया गया।