व्रत पूजन: क्या आपको लगता है कि आपसे रूठी हुईं हैं मां लक्ष्मी, करें ये व्रत मिलेगा आशीष

June 10th, 2022

डिजिटल डेस्क, भोपाल। पूजा-पाठ, व्रत, भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। सप्ताह के हर दिन के किसी न किसी देवी-देवताओं की पूजा का विधान सदियों से चला आ रहा है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे वैभव लक्ष्मी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का बहुत ही विशेष महत्व होता है। आप के जीवन में कभी भी पैसों की कमी न हो इसके लिए लोग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। माना जाता है कि अगर आप से मां लक्ष्मी रूठ गई हैं तो आप उन्हें वैभव लक्ष्मी व्रत से मना सकते हैं। 

कब किया जाता है वैभव लक्ष्मी व्रत पूजन

वैभव लक्ष्मी व्रत शुक्रवार को किया जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा शाम के समय की जाती है। इस व्रत को आप काफी आसानी से कर सकते हैं। जितनी आप से श्रद्धा हो उतना ही व्रत रखना चाहिए। आप चाहें तो पूरे दिन भी व्रत रख सकते हैं, और चाहें तो एक समय भोजन भी कर सकते हैं। शुक्रवार को शाम को स्नान करने के बाद पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें और प्रतिमा के बगल में श्रीयंत्र रखें। श्वेत रंग मां को बहुत प्रिय है। तो मां को सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद फूल,चावल की खीर आदि मां लक्ष्मी को अर्पित करें। पूजा के बाद वैभव लक्ष्मी कथा का पाठ जरुर करें और पाठ खत्म होने के बाद आरती करें। 

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

पूजा में सिक्के जरूर रखें

वैभवलक्ष्‍मी की पूजा में सोने की धातु का बहुत महत्व होता है। यह जरुरी नहीं कि आप सोने की ही धातु का उपयोग करें। पर यह शुभ मानी जाती है। आप चाहें तो चांदी के सिक्‍के या सामान्‍य सिक्‍के को भी गंगाजल से धोकर पूजा करते समय रख सकते हैं। पूजा के बाद इन सिक्‍कों को तिजोरी या लॉकर में रख दें। इससे घर में बरकत आती है। और कभी भी इन सिक्के को किसी को नहीं देना चाहिए। 

वैभव लक्ष्मी व्रत पूजन सामग्री-
मां लक्ष्मी की प्रतिमा , फूल माला,  एक  कलश, अक्षत, विभूति, मौली, दर्पण, कंघा, पान के पत्ते, पंचामृत, दही, दूध, जल, धूप बत्ती, दीपक, कपूर, घंटी और प्रसाद। 

 

डिसक्लेमर- ये जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर है। भास्कर हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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