दैनिक भास्कर हिंदी: सावन में इन शिवालयों में महादेव-दर्शन का महत्व

August 29th, 2018

डिजिटल डेस्क,भोपाल। सामवन के महीने में भगवान शिव की आराधना खास महत्व है। शास्त्रों में भी महादेव की आराधना को सरल और आसान बताया गया है। 10 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। जिसके साथ ही शिवायों में भक्तों का तांतां लग गया है।

भक्त के शिव मंदिरों में जल अपर्ण करने और भगवान को प्रसन्न करने जा रहे हैं। लोग पास मौजूद मंदिरों के सात ही दूर-दराज के शिवालयों में पहुंच रहे हैं। हम आज आपको बता रहे हैं मध्यप्रदेश के कुछ प्रसिद्ध शिव-मंदिरों के बारे में, जहां आप सावन में जा सकते हैं।

जटाशंकरः एमपी के पंचमढ़ी में स्थित जटाशंकर एक पवित्र गुफा है। इसके ऊपर एक बिना किसी सहार का झूलता हुआ विशाल शिलाखंड रखा है। यहां शिव का एक प्राकृतिक शिवलिंग बना हुआ है। जटाशंकर मार्ग पर एक हनुमान मंदिर है,जहां हनुमान की मूर्ति एक शिलाखंड पर उकेरी गई है। जटाशंकर गुफा के नजदीक ही हारपर्स गुफा है। इस गुफा में वीणा बजाते हुए एक व्यक्ति का चित्र है।

महादेव गुफाः पंचमढ़ी से 10 किलोमीटर दूर स्थित महादेव गुफा भगवान शिव को समर्पित है। ये गुफा 30 मीटर लंबी है और यहां सदैव पानी बहता रहता है। कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव यहीं पर छिपे थे। दरअसल भगवान शिव ने ही भस्मासुर को वरदान दिया था कि वो जिस के सिर पर हाथ रख देगा वह भस्म हो जाएगा। गुफा के भीतर एक शिवलिंग बना हुआ है। शिवरात्रि यहां पूर जोश के साथ मनाई जाती है। महादेव पहुंचने का मार्ग काफी दुर्गम है।

रामसेतु पत्थरः पचमढी में ही एक और प्रसिद्द मंदिर है। इस मंदिर में भगवान राम, लक्षण भरत और शत्रुघन के बाल रूप की मूर्तियां रखी गई है। इसी मंदिर की एक और खासियत है कि यहां रामसेतु पत्थर भी देखने को मिलता है। रासेतु पत्थर की मदद से भारत से लंका तक पुल का निर्माण किया गया था। और रावन को मार कर भगवान रान सीता जी बचाया था।

पचमढ़ी के इन स्थानों का सावन के महीने बहुंत महत्तव रखते है। इस मौसम इस जगह की खुबसूरती और भई बढ़ जाती है। जिस वजह से भी यहां लोग घुमने आते है।

ओंकारेश्वरः ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। ये भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक है। ऐसी मान्यता है कि ओंकारेश्वर का निर्माण नर्मदा नदी से स्वतः ही हुआ है। सावन के महीने में यहां दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते है।

महाकालेश्वरः मध्यप्रदेश उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। मानयता है कि, इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

भोजपुरः एमपी की राजधानी भोपाल के पास भोजपुर गांव में एक विशाल शिव मंदिर है। जिसे भोजपुर मंदिर या भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर पूर्ण रुपेण तैयार नहीं बन पाया। इसका चबूतरा बहुत ऊँचा है, जिसके गर्भगृह में एक बड़ा- सा पत्थर के टूकड़े का पॉलिश किया गया लिंग है, जिसकी ऊँचाई ३.८५ मी. है। इसे भारत के मंदिरों में पाये जाने वाले सबसे बड़े लिंगों में से एक माना जाता है।