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सावन के महीने में इन 5 शिव मंदिरों के करें दर्शन, खूबसूरत नजारों का भी लें आनन्द

July 31st, 2018 20:38 IST

डिजिटल डेस्क । भारत में कई तरह की संस्कृति है, यहां आपको, कई धर्म, भाषा, कला, खान-पान और फैस्टिवल्स देखने को मिलेंगे।यहां कि हवा में हर दिन कुछ ना कुछ खास होता। एक तीज-त्यौहार जाता है तो दूसरे की शुरूआत हो जाती है। हाल में शादियों के मुहूर्त खत्म हुए है और अब श्रावण के महीने में सावन सोमवार की शुरूआत हो गई है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की खास अराधना होती है और शिवालयों में एक अलग ही तरह की रौनक देखने को मिलती है। मूल रूप से मानसून का मौसम और श्रावण का महीना भक्तों के लिए भागवान के दर्शन करने के साथ-साथ घूमने-फिरने के लिए भी खास होता है। दरअसल भगवान शिव भी ऐसी जगहों पर अराधना किया करते थे जो आम लोगों की पहुंच से दूर हुआ करती थी। इसलिए कुछ मंदिर आज भी बेहद दूर और बेहद खूबसूरत जगहों पर स्थापित हैं। इस महीने में शिवालयों में दर्शनों का खास महत्व होता है, इसलिए आज आपको ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप भगवान के दर्शनों के साथ, इन जगहों के खूबसूरत नजारों का भी मजा ले सकते हैं। 

केदारनाथ, उत्तराखंड

सबसे महत्वपूर्ण शिव मंदिरों में से एक केदारनाथ। ये समुद्र तल से 3583 मीटर की ऊंचाई पर है और उत्तराखंड की यात्रा का हिस्सा है। मंदिर अप्रैल से नवंबर तक खुला रहता है और सर्दियों के महीनों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, इसलिए इसे बंद रखा जाता है। आप सावन के महीने में यहां जा सकते हैं। ये मंदिर अपनी भव्यता औऱ खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। मंदिर के पीछे दिखते ऊंचे पहाड़ इस मंदिर की खूबसूरती को और भी बढ़ा देते हैं। 

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लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक, लिंगराज मंदिर भी शहर में सबसे बड़ा मंदिर है। ये 11 वीं शताब्दी में बनवाया गया था और संस्कृत ग्रंथों में इसका उल्लेख है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर आपको मूर्तियां नजर आएंगी। ये उस दौर की संस्कृति को दिखाती है। बारिश में मंदिर के आस-पास हरियाली बढ़ जाती है जो इसे और भी खूबसूरत बनाती है। 

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भीमाशंकर, महाराष्ट्र

भीमाशंकर शिव मंदिर के नाम से विख्यात ये मंदिर पुणे के करीब शिराधन गांव में स्थित है। इसे मोटेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र में पेशवाओं के काल के प्रसिद्ध राजनेता नाना फड़नविस ने इस मंदिर में सभामंडप और शिखर बनवाकर इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया था। यानी स्थापत्य कला के मामले में ये मंदिर आधुनिक और पुरातन नागर शैली का मिश्रित रूप है। यहां बुद्ध स्टाइल से की गई अंबा-अंबिका की नक्काशी, मन्माड की 1034 फीट की ऊंचाई पर भीमाशंकर, हेमदपंथी में नाना फड़नविस के द्वारा ही बनवाई खास घंटी भी देखने लायक है।

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काशी विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में काशी यानी वाराणसी को भगवान शिव की नगरी ही कहा जाता है। भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में गंगा नदी के तट पर विद्यमान है। सावन आते ही भगवान शिव के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस मंदिर के दर्शन को मोक्ष प्रदायी माना जाता है। काशी विश्वनाथ में की जाने वाली आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां दिन में पांच बार आरती आयोजित की जाती है। मंदिर रोजाना रात 2.30 बजे खुल जाता है। बाबा विश्वनाथ के मंदिर में तड़के सुबह की मंगला आरती के साथ पूरे दिन में चार बार आरती होती है। भक्तों के लिए मंदिर को सुबह 4 से 11 बजे तक के लिए खोल दिया जाता है फिर आरती होने के पश्चात दोपहर 12 से सायं 7 बजे तक दोबारा भक्तजन मंदिर में पूजा कर सकते हैं। सायं सात बजे सप्त ऋषि आरती का वक्त होता है। उसके बाद 9 बजे तक श्रद्धालु मंदिर में आ जा सकते हैं। 9 बजे भोग आरती शुरू की जाती है इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में प्रवेश वर्जित है। रात 10.30 बजे शयन आरती का आयोजन किया जाता है। मंदिर रात 11 बंद कर दिया जाता है।

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तारकेश्वर मंदिर, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में तारकेश्वर मंदिर स्थित है। मंदिर में पूजा की जाने वाली लिंगम वास्तव में पुराने दिनों में राजा विष्णु दास को वन में मिला था। भगवान शिव को सपने में देखने के बाद राजा विष्णु दास ने ये मंदिर बनवाया था और ये पश्चिम बंगाल के हिंदुओं के बीच एक बेहद लोकप्रिय तीर्थ स्थल है।

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