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घर में पूजा करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखें

July 03rd, 2018 10:21 IST
घर में पूजा करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखें

डिजिटल डेस्क, भोपाल। पूजा करने की विधि कैसी हो इस प्रकार के विषय में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं होती। इसलिए घर में पूजा स्थान पर होने वाले दोष आपको इससे मिलने वाले फल से वंचित रख सकते हैं। घर में की जाने वाली पूजा का सम्पूर्ण फल पाने के लिए आप पूजा स्थान से जुड़ीं जानकारियों को अच्छे से समझकर उनका उपयोग करें।


घर में पूजा स्थान कहाँ होना चाहिए ? 

  • शास्त्रों के अनुसार घर में पूजा करने का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए। 
  • उत्तर दिशा और पूर्व दिशा के बीच का भाग ईशान कोण होता है।  
  • ईशान कोण को शुभ कार्यों के लिए सबसे उत्तम दिशा माना गया है।  
  • इस दिशा में पूजा के मंदिर को स्थापित करें। यदि किसी कारणवश ऐसा न भी कर पाएं तो भूलकर भी घर के ईशान कोण में गंदगी जमा न होने दें व घर के इस हिस्से को सदा पवित्र रखें। ईशान कोण के अतिरिक्त पूर्व दिशा भी पूजा स्थान के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। इसलिए आप घर में ईशान कोण व पूर्व दिशा दोनों में से जहां भी सुविधाजनक रूप से पूजा स्थल की स्थापना कर सकें।


पूजा स्थल में क्या रखें और क्या नहीं ? 

पूजा स्थल में कौन-कौन सी वस्तुएं शुभ और अशुभ होती हैं। जिससे इन्हें तुरंत पूजा स्थल से हटा दिया जाए। वैसे तो पूजा के स्थान की सजावट व्यक्ति की श्रद्धा और कला पर निर्भर करती है इसमें कोई बाध्यता नहीं है। पूजा स्थल में कौन-कौन से देव व देवी की प्रतिमा लगानी है वो भी व्यक्ति की देवों के प्रति श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है किन्तु पूजा स्थल में कुछ चीजों का होना बहुत जरुरी है, इनके होने से आप दैनिक पूजा-पाठ का सम्पूर्ण फल प्राप्त करते हैं। तो आइये जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी चीजें हैं जो पूजा स्थल में होनी चाहिए ?

  • पूजा स्थल में गणेश जी कीस्थापना अवश्य करें। इसके लिए एक सुपारी पर लाल धागे (मौली) को 
  • लपेट लें और कुमकुम से तिलक कर एक कटोरी में थोड़े चावल रखकर स्थापित करें। 
  • पूजा स्थल में एक कोने में बंद पात्र में गंगाजल अवश्य रखना चाहिए। 
  • एक तांबे के छोटे से लोटे में जल को पूजा स्थल में अवश्य रखना चाहिए। प्रतिदिन इस पात्र का जल बदलना चाहिए व पुराने जल को पीपल के पेड़ या तुलसी के पौधे में डाल सकते हैं। 
  • पूजा के स्थान में एक देव की सिर्फ एक ही प्रतिमा रखें। यदि आपके पास एक देव की एक से अधिक प्रतिमा पूजा स्थल में हैं तो उन्हें घर में कहीं भी दीवार आदि पर लगा सकते हैं किन्तु पूजा स्थल में एक देव की एक ही प्रतिमा रखें। 
  • घर में पूजा के स्थान पर कभी भी बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। बड़ी मूर्तियों में प्राण-प्रतिष्ठा होना अनिवार्य हो जाता है। इसलिए बड़ी मूर्तियां मंदिर के लिए ही उचित हैं। पूजा स्थल में छोटी मूर्ति रख सकते हैं। 
  • पूजा करने के स्थान पर भूलकर भी अपने पित्र देव (स्वर्गीय माता, पिता या गुरु) की फोटो न लगाए।  उनका स्थान अलग रखें। 
  • पूजा स्थल में कूड़ा-कचरा एकत्रित न होने दें। प्रतिदिन पूजा घर की सफाई करें। 
  • अगर आपने पूजा घर में कोई मूर्ती की स्थापना की हुई है तो ध्यान दें, मूर्ती का कोई भी हिस्सा खंडित नहीं होना चाहिए। मूर्ति खंडित होने पर तुरंत उसे वहां से हटा दें। खंडित मूर्ति को बहते जल में विसर्जित कर सकते हैं। 
  • पूजा स्थल में चमड़े की कोई वस्तु जैसे पर्स, बेल्ट या चमड़े का बैग आदि कभी न रखें। 
  • पूजा के समय यदि संभव हो तो शुद्ध देसी गाय के घी का प्रयोग करें, व भोग लगाने के लिए अग्नि में गाय के गोबर के कंडो (ऊपलों) का ही प्रयोग करना उत्तम माना गया है। 
  • पूजा-पाठ के समय दीपक कभी भी बुझना नहीं चाहिए, शास्त्रों में यह एक बड़ा अपशगुन माना गया है। 
  • पूजा-पाठ के समय गुग्गल युक्त धूपबत्ती का प्रयोग करें। गुग्गल घर के वातावरण को शुद्ध और घर से नकारात्मक ऊर्जा या बुरे दोष को दूर करती है। 
  • रात्रि को सोते समय पूजा स्थल को लाल पर्दे द्वारा ढक दें व सुबह होने पर पर्दे को हटा दें।


इस तरह से करें पूजा

हिन्दू धर्म में शास्त्रवत पूजा का विधान बहुत ही बड़ा है जिसके लिए पर्याप्त समय निकालना सभी के लिए कठिन होता है। किन्तु फिर भी जीवन में सकारात्मकता के लिए पूजा-पाठ तो आवश्यक है। तो चलिए आपको बताते हैं पूजा-पाठ के तरीके के बारे में।

1. पूजा-पाठ के लिए एक निश्चित समय का चुनाव कर प्रतिदिन उसी समय पर पूजा-पाठ करने का प्रयास करें। 
2. आसन बिछाकर, शांत मन के साथ बैठ जाएं। घी का दीपक व धूप प्रज्वलित करें। 
3. पूजा के समय सर्वप्रथम गणेश जी के स्तुति मंत्र द्वारा गणेश जी का आव्हान करें। 
4. गणेश जी के आव्हान के बाद अपने ईष्ट देव के स्तुति मंत्र द्वारा उनका ध्यान करें, तत्पश्चात अपने ईष्ट देव के मंत्र जप व पाठ आदि करें। अंत में अपने ईष्ट देव या देवी की आरती करें। 
5. अब एक मिनट के लिए परमपिता परमेश्वर का ध्यान करें और जमीन पर अपना मस्तक स्पर्श करते हुए भगवान को प्रणाम करें और खड़े हो जाएं। 
6. अब अपने घर में स्वर्गीय बुजुर्गों की फोटो के पास जाकर उन्हें प्रणाम करें व अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करें।

अशुभ वस्तुओं को आज ही अपने पूजा स्थल से हटा दें। इस प्रकार घर में पूजा स्थल की स्थापना कर 
पूजा-पाठ करने से आप पूजा-पाठ का सम्पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। देव कृपा आपके घर पर सदैव बनी रहती है। नियमानुसार घर में पूजा-पाठ करने से घर से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।
 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।