MP Education: मध्य प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में बना रहा नई पहचान: मोहन यादव सरकार में तेजी से बदल रही तस्वीर

मध्य प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में बना रहा नई पहचान: मोहन यादव सरकार में तेजी से बदल रही तस्वीर
मध्य प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ समय में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। खासकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ समय में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। खासकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। “स्कूल चले हम 2026” जैसे अभियान से लेकर डिजिटल शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और ड्रॉपआउट कम करने तक, सरकार का फोकस साफ है, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना। आंकड़े और रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

“स्कूल चले हम 2026”: हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने की पहल

मध्य प्रदेश सरकार का “स्कूल चले हम 2026” अभियान शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। 1 से 4 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।

इस अभियान के जरिए सरकार ने 1.45 करोड़ बच्चों के नामांकन का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि कक्षा 1, 6 और 9 में एडमिशन प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है, जिससे माता-पिता और बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो।

सरकार का दावा है कि इस तरह की पहल से न केवल नामांकन बढ़ा है बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

ड्रॉपआउट दर में बड़ी कमी, प्राथमिक कक्षाओं में शून्य ड्रॉपआउट

शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ड्रॉपआउट रेट में गिरावट। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि सरकारी स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हो चुकी है।

6 से 14 साल के बच्चों में नामांकन दर 97% तक पहुंच गई है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं 15-16 वर्ष आयु वर्ग में भी स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है।

यह बदलाव दिखाता है कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर असर डाल रही हैं।

सरकारी स्कूलों में बढ़ा भरोसा, नामांकन में रिकॉर्ड वृद्धि

सरकारी स्कूलों में नामांकन में 32.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जबकि कुल नामांकन में 19.6% की वृद्धि हुई है। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि अब लोग निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों की ओर भी भरोसे के साथ देख रहे हैं।

सरकार ने मुफ्त साइकिल, यूनिफॉर्म, किताबें और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं देकर शिक्षा को अधिक सुलभ और आकर्षक बनाया है।

संदीपनि और पीएम श्री स्कूल: आधुनिक शिक्षा की दिशा में कदम

राज्य सरकार ने 369 “संदीपनि स्कूल” शुरू किए हैं, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इन स्कूलों में बच्चों के समग्र विकास पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट भी शामिल है।

इसके अलावा, पीएम श्री स्कूल भी शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक लैब जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

डिजिटल शिक्षा में तेजी से सुधार

ASER 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है।

• 14-16 साल के 87% बच्चों के घर में स्मार्टफोन उपलब्ध है

• 80% बच्चे स्मार्टफोन चलाना जानते हैं

यह आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल लर्निंग अब तेजी से गांवों और छोटे शहरों तक पहुंच रही है। इससे ऑनलाइन शिक्षा और ई-लर्निंग को भी बढ़ावा मिला है।

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प्री-स्कूल शिक्षा में बढ़ती भागीदारी

राज्य में छोटे बच्चों की शिक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

• 3 साल के 84% बच्चे प्री-स्कूल में नामांकित हैं

• 4 साल के 68.1% बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े हैं

यह दर्शाता है कि सरकार शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है, जिससे बच्चों की नींव मजबूत हो सके।

लर्निंग आउटकम में सुधार, लेकिन अभी और मेहनत जरूरी

ASER रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बच्चों की पढ़ाई के स्तर में सुधार हुआ है:

• कक्षा 3 के 18.8% बच्चे अब कक्षा 2 का पाठ पढ़ सकते हैं (2022 में यह 12.1% था)

• कक्षा 5 में पढ़ने की क्षमता 35.6% से बढ़कर 43.7% हुई

• कक्षा 8 में यह आंकड़ा 67% तक पहुंच गया

गणित में भी सुधार देखने को मिला है, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है।

• माइनस के सवाल हल करने वाले बच्चों का प्रतिशत 15.1% से बढ़कर 17.5% हुआ

• भाग देने वाले छात्रों का प्रतिशत 19.1% से बढ़कर 21.8% हुआ

इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: स्कूल बने ज्यादा सुविधाजनक

सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर भी खास ध्यान दिया है।

• साफ पानी

• शौचालय

• मिड-डे मील

• डिजिटल लैब

इन सुविधाओं में 2022 से 2024 के बीच काफी सुधार हुआ है। इससे बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है।

शिक्षकों की भर्ती से दूर हुई कमी

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 76,325 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर किया गया है।

अच्छे शिक्षक किसी भी शिक्षा प्रणाली की रीढ़ होते हैं और इस दिशा में सरकार का यह कदम बेहद अहम है।

मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन: लैपटॉप और स्कूटर योजना

सरकार मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई योजनाएं चला रही है।

• 75% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों को लैपटॉप

• स्कूल टॉपर्स को स्कूटर

इस तरह की योजनाएं बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करती हैं और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं।

लैब और स्किल एजुकेशन पर जोर

स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक लैब और व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इससे बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें नई तकनीक और कौशल भी सिखाए जा रहे हैं, जो भविष्य में उनके करियर के लिए उपयोगी साबित होंगे।

जेंडर गैप में कमी: लड़कियों की शिक्षा में सुधार

शिक्षा के क्षेत्र में एक और सकारात्मक बदलाव है—लड़कों और लड़कियों के बीच का अंतर कम होना।

• 2016 में 29.8% लड़कियां स्कूल से बाहर थीं

• 2024 में यह घटकर 16.1% हो गया

यह आंकड़ा दिखाता है कि अब समाज में लड़कियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

आगे की राह: शिक्षा का हब बनने की ओर मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

इसके लिए लगातार नई नीतियां, योजनाएं और सुधार लागू किए जा रहे हैं। सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से राज्य शिक्षा के क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है।

Created On :   4 April 2026 12:00 PM IST

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