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ट्रेजडी क्वीन का 85वां बर्थडे : मीना कुमारी को देख अक्सर डायलॉग भूल जाया करते थे राजकुमार

August 01st, 2018 11:01 IST
ट्रेजडी क्वीन का 85वां बर्थडे : मीना कुमारी को देख अक्सर डायलॉग भूल जाया करते थे राजकुमार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अपने दमदार और संजीदा अभिनय से सिने प्रेमियों के दिलों पर छा जाने वाली ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी का आज 85वां जन्मदिन है। मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1933 को हुआ था। वे एक मशहूर भारतीय फिल्म अभिनेत्री के साथ साथ, एक गायिका और कवियत्री भी थीं। फिल्म इंडस्ट्री में वे ट्रेजेडी क्वीन और फीमेल गुरु दत्त के नाम से भी जानी जाती हैं। उन्हें भारतीय फिल्मों की सिंड्रेला के रूप में याद किया जाता है। मीना कुमारी ने अपनी खूबसूरती से करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया। वे एक ऐसी अभिनेत्री थीं जिनके साथ हर कलाकार काम करना चाहता था। इतना ही नहीं उनके ऐसे कई दीवाने भी थे जो उनके इश्क में पागल थे। जन्मदिन के खास मौके पर आइए डालते हैं एक नजर उनके इश्क में पागल ऐसे ही कुछ खास दीवानों पर... 

मीना को देख राजकुमार भूल जाते थे डायलॉग
अंधेरी रात है, ट्रेन की सीटी बजती है, एक अजनबी ट्रैन के कम्पार्टमेंट में आता है, मीना कुमारी गहरी नींद में डूबी हैं, उनके बेहद खूबसूरत मेहंदी लगे पांव, उन्हें ये अहसास भी न हुआ कि कोई अजनबी उनके पैरों का दीवाना हो गया! वो एक पर्चे पर लिखता है - "आपके पांव बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारना, मैले हो जाएंगे।" और उस पर्चे को मीना कुमारी के पैरों की उंगलियों के बीच फंसा कर अगले स्टेशन पर उतर जाता है। जी हाँ, ये फ़िल्म पाक़ीज़ा का वही मशहूर सीन है, जिसके डायलॉग को आज भी हर खूबसूरत पैर की तारीफ में बार बार दोहराया जाता है, और यह अजनबी एक्टर थे राजकुमार। राजकुमार तो मीना कुमारी के इश्क़ में इस कदर पागल थे, कि सेट पर मीना डायलॉग्स बोलती, या एक्टिंग करती, तो राजकुमार एकटक उन्हें देखते, और कई बार अपने डायलॉग ही भूल जाते थे।

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धर्मेंद्र को फिल्म से निकाल दिया
ये उन दिनों की बात है, जब धर्मेन्द्र और मीना कुमारी के इश्क के चर्चे हर जुबान पर थे। उन दिनों अफवाहें थीं कि मीना कुमारी का अपने पति कमाल अमरोही से अलग होने के बाद धर्मेंद्र के प्रति झुकाव पैदा हो गया है। धर्मेंद्र को पाकीज़ा के लिए साइन किया गया था, लेकिन उनके और मीना के अफेयर के किस्सों की वजह से कमल ने चिढ़कर धर्मेंद्र को फिल्म से निकाल दिया और उनकी जगह राजकुमार को साइन कर दिया। लेकिन इसके बाद भी कमाल के साथ धोखा हो गया। ट्रेन वाले सीन के बाद राजकुमार का दिल मीणा पर आ गया और ये किस्से भी जल्दी ही मशहूर होने लगे। जब इस सीन के दौरान, पहली बार मीना के पैर राजकुमार ने करीब से देखे तो वो भी खुद को उनसे इश्क करने से नहीं रोक पाए और नाराज़ कमाल ने राजकुमार से भी फिल्म में बहुत ही कम सीन्स करवाए।

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भारत भूषण के साथ भी जुड़ा मीना का नाम
एक बेहद रोमांटिक गाना...'चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो'..., फिल्माया जा रहा था तब, कमाल ने राजकुमार और मीना को ज़्यादा न फिल्मा कर, खूबसूरत मौसम को शूट किया। राजकुमार ने मीना के साथ एक और बेहद रोमांटिक गाने में शूटिंग की है - 'छू लेने दो नाजुक होठों को'...। इसमें उन्हें मीना के साथ इश्क फरमाने का अच्छा मौका मिला। ये गाना था फिल्म "काजल" का। इस फिल्म में धर्मेंद्र भी थे, लेकिन मीना और राजकुमार ने खूब सुर्खियां बटोरी। मीना कुमारी का नाम राजकुमार और धर्मेंद्र के अलावा भी कई लोगों से जोड़ा गया। कहा जाता है कि नायक भारत भूषण ने भी फिल्म "बैजू बावरा" के निर्माण के दौरान, अपने प्रेम का इजहार मीना कुमारी से किया था। इतने सारे चाहने वालों के बावजूद मीना कुमारी को नाम, इज्जत, शोहरत, काबिलियत, रुपया, पैसा सभी कुछ मिला पर सच्चा प्यार कभी नहीं मिल सका। इश्क में नाकाम मीना इस गम को भूलाने के लिए शराब के नशे में डूबी रहने लगीं। अत्यधिक शराब के सेवन से वो लिवर सिरोसिस की शिकार हो गई और फिल्म 'पाकिजा' के रिलीज के कुछ ही हफ्तों बाद 31 मार्च 1972 को 39 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।