यूक्रेन का बड़ा हमला!: रूस के अंदर 1200 किमी दूर किया अटैक, हथियार प्लांट... तेल रिफाइनरी समेत कई ठिकाने तबाह

रूस के अंदर 1200 किमी दूर किया अटैक, हथियार प्लांट... तेल रिफाइनरी समेत कई ठिकाने तबाह
रूस और यूक्रेन के बीच लगातार हमले जारी है, जो और गहरे होते हुए नजर आ रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी सेना ने रूस के भीतर 1200 किलोमीटर दूर हमले किए हैं।

डिजिटल डेस्क, कीव। रूस और यूक्रेन के बीच लगातार हमले जारी है, जो और गहरे होते हुए नजर आ रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी सेना ने रूस के भीतर 1200 किलोमीटर दूर हमले किए हैं। इन हमलों के जरिए हथियारों के बनाने वाले प्लांट, तेल रिफाइनरी, फ्यूल डिपो, लॉडिस्टिक्स हब और कैस्पियन सागर में जहाज को टारगेट बनाया गया था।

यूक्रेन ने युद्ध रणनीति में किया बदलाव

जेलेंस्की इन हमलों को लॉन्ग-रेंज सैंक्शंस यानी लंबी दूरी की रोकथाम बता रहे हैं। जिसे उन्होंने यूक्रेन की नई रणनीति का हिस्सा भी बताया है। इस वजह से रूस की युद्ध मशीन को सीधे टारगेट कर पाए हैं। वे आगे कहते हैं कि ये हमले उनके जवाब में किए गए है, जिसमें रूस ने यूक्रेन के शहरों और ऊर्जा ढांचों पर किए थे। यूक्रेन अब धीरे-धीरे रूस के अंदर तक घुसकर हमले कर रहा है, इसमें उराल और साइबेरिया के इलाके शामिल हैं। इससे उसके युद्ध की प्रकृति बदल रही है।

हथियार प्लांट पर हमला

यूक्रेनी राष्ट्रपति कहते हैं कि उनकी डिफेंस फोर्सेस ने कई क्षेत्रों में सफल हमले किए हैं। इसमें कीरोव में हथियार प्लांट शामिल है। उन्होंने बताया कि इसी प्लांट से रूस को यूक्रेन पर हमले करने के लिए पार्ट्स भेजे जाते हैं। जिस इलाके में ये प्लांट स्थित है, वह यूक्रेन से करीब 1200 किलोमीटर दूर स्थित है। उन्होंने बताया कि त्युमेन में स्थित तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया, इस वजह से यहां पर भीषण आग लगी है।

ईरान से जुड़े हुए कार्गो पर अटैक

जेलेंस्की आगे बताते हैं कि येकातेरिनबर्ग में वाइल्डबेरीज लॉजिस्टिक्स हब को टारगेट किया गया है, जो रूस की सप्लाई चेन के लिए काफी अहम माना जाता है। इसके अलावा रोस्तोव-ऑन-डॉन में फ्यूल और लुब्रिकेंट्स के डिपो को निशाना बनाया गया है। इस हमले की सबसे खासबात यह रही कि कैस्पियन सागर में सैन्य कार्गो वाले जहाजों और एक युद्धपोत को निशाना बनाया गया था, इस दौरान उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि ये कार्गो ईरान से जुड़ा हुआ है।

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