Khamenei Funeral: ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई का मौत के बाद अब तक नहीं हुआ अंतिम संस्कार, जानें कब तक रखी जा सकती है बॉडी

ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई का मौत के बाद अब तक नहीं हुआ अंतिम संस्कार, जानें कब तक रखी जा सकती है बॉडी
खामेनेई की मृत्यु के बाद भी अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। ऐसे में जानते हैं कि बॉडी को कब तक सही सलामत रखा जा सकता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के पूर्व सीएम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई का निधन हुए काफी दिन बीत गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका निधन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए हमले में हुई थी। मौत के इतने दिनों के बाद भी उनके अंतिम संस्कार की रस्में अब तक पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं कि उनका अंतिम संस्कार अब तक क्यों नहीं हुआ है। साथ ही दफनाने से पहले किसी भी शव को असल में कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

शिया इस्लाम में क्या है दफनाने की परंपरा?

शिया इस्लाम के अनुनायियों बीच अंतिम संस्कार की रस्में तुरंत दफनाने पर जोर देती हैं। जब भी किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसके शव को आमतौर पर स्नान करवाया जाता है और कपन के एक सफेद कपड़े में लपेट दिया जाता है। इसके बाद जनाजा उठता है और नमाज के बाद शव को जल्दी से जल्दी दफनाया जाता है।

क्या है देरी के पीछे की वजह?

खामेनेई के मामले में अंतिम संस्कार में देरी होने का मुख्य कारण सुरक्षा बताई जा रही है। क्योंकि वो ईरान के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों में से एक हैं। इस वजह से ही ये अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के जुलूस में भारी भीड़ उमड़ सकती है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच इतने लोगों का एक साथ इकट्ठआ होना बिल्कुल सही नहीं होगा। ये जमावड़ा किसी भी हमले या सुरक्षा संबंधित घटना का निशाना बन सकता है। इस वजह से अंतिम संस्कार को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है।

किसी शव को कितने दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित?

वैज्ञानिकों के नजरिए से देखा जाए तो, किसी भी बॉडी को सुरक्षित रखने की समय सीमा इस्तेमाल की गई तकनीक पर निर्भर करता है। अगर किसी बॉडी को कोल्ड स्टोरेज या फिर रेफ्रिजरेशन में रखा जाता है तो उसकी सड़ने और गलने की प्रक्रिया बहुत ही कम हो जाती है। वहीं, कई देशों में एम्बामिंग प्रक्रिया का भी इस्तेमाल होता है। इसमें शरीर से खून निकल कर उसके जगह फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रासायनिक संरक्षक भर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया किसी शव को महीनों या सालों तक भी सुरक्षित रख सकती है। लेकिन इस्लामी परंपराओं में आमतौर पर इस प्रक्रिया से परहेज किया जाता है क्योंकि इसमें रसायनों का इस्तेमाल करके शरीर में बदलाव करना शामिल होता है।

Created On :   15 March 2026 2:46 PM IST

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