US Iran Ceasefire: क्या सीजफायर के अमेरिका से गिड़गिड़ाया था ईरान? अमेरिकी रक्षा मंत्री के दावे ने भड़काई जंग की आंच

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान सीजफायर को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। दरअसल, उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका से सीजफायर के लिए ईरान गिड़गिड़ाया था। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिका के भारी प्रेशर के बीच ईरान ने इस युद्धविराम के लिए भीख मांगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इतिहास रच दिया है।
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अमेरिका-ईरान सीजफायर पर अमेरिकी रक्षा मंत्री का बड़ा बयान
इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि हम महान देशभक्त अमेरिकियों की ओर से एक स्पष्ट मिशन को पूरा करने में व्यस्त हैं। यह 47 साल से रुका हुआ था। लोग इसके बारे में कुछ भी कहें हम इसे पूरा करके ही रहेंगे।
हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत पर सैकड़ों रॉकेट और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन दागे। वे इसके पीछे पागल थे। वे कभी इसके करीब भी नहीं पहुंच पाए। उनमें से हर एक हमले को लिंकन से मीलों दूर ही मार गिराया गया। वे अपना गोला-बारूद बस हवा में बर्बाद कर रहे थे।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस युद्धविराम के लिए ईरान ने गुहार लगाई। ईरान चाहता था कि ऐसा हो। ईरान को सैन्य हार का सामना करना पड़ा है। हमने ठीक वही हासिल किया जो हम चाहते थे। ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है। ईरान ने भारी दबाव में आकर युद्धविराम स्वीकार किया है। इस नए शासन के पास अब समय और विकल्प दोनों ही खत्म हो चुके थे। अब हमारे पास सच्ची शांति और एक असली समझौते का मौका है।
ईरान के अमेरिका से सीजफायर के लिए गिड़गिड़ने का किया दावा
उन्होंने कहा कि ईरान के पिछले सर्वोच्च नेता मारे गए। सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मारे गए। सर्वोच्च नेता के कार्यालय के सलाहकार मारे गए। सर्वोच्च नेता के सैन्य कार्यालय के प्रमुख मारे गए। रक्षामंत्री अब हमारे बीच नहीं है। IRGC के कमांडर मारे गए। सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ कमांडर मारे गए। खुफिया मंत्री मारे गए। आईआरजीसी के कमांडर अब यहां नहीं है। उनके खुफिया प्रमुख मारे गए। मैंने अभी कई नाम छोड़ दिए हैं। मैं इस सूची को और भी आगे बढ़ा सकता हूं। इसमें ईरान के नए तथाकथित सर्वोच्च नेता शामिल हैं, जो घायल हैं।
यूएस रक्षामंत्री ने कहा कि उन्हें इस समझौते के लिए मजबूर किया गया है। उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने रहम चुना। उन्होंने इस ठिकानों पर हमला नहीं किया। ईरान ने भारी दबाव में आकर युद्धविराम स्वीकार कर लिया था। ईरान के नए शासन को यह बात समझ आ गई थी कि एक समझौता करना, उस भयानक अंजाम से कहीं बेहतर होगा, जो उनका इंतजार कर रहा था।
Created On :   8 April 2026 8:28 PM IST












