ईरान से पहले होर्मुज पर किसका कब्जा?: इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलने के लिए 'कार्टाजा' किया जारी, इसकी खोज से है भारत का नाता!

इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलने के लिए कार्टाजा किया जारी, इसकी खोज से है भारत का नाता!
आज होर्मुज पर ईरान का दबदबा है, लेकिन एक समय ऐसा था, जिस पर किसी दूसरे देश का दबदबा था और यहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स भी वसूलने का काम करता था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी हमलों पर विराम लग गया है। इन हमलों के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा ईरान से सटा एक अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की हो रही थी, क्योंकि ईरान ने इसको बंद कर दिया था और यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर वह लगातार हमले कर रहा था। इससे दुनियाभर में ऊर्जा संकट देखने को मिला है। इसी रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होती है। आज होर्मुज पर ईरान का दबदबा है, लेकिन एक समय ऐसा था, जिस पर किसी दूसरे देश का दबदबा था और यहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स भी वसूलने का काम करता था। ऐसे में समझते है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान से पहले किस देश के कब्जे में था।

ईरान का दावा

ईरान हमेशा से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पर दावा किया है और कई ऐसे मौके भी आए है कि जब खाडी देशों में जंग छिड़ी है, तब-तब होर्मुज में बाधा उत्पन्न हुई है। लेकिन हमेशा ऐसे हालात देखने को नहीं मिले हैं। एक समय ऐसा भी रहा है कि न ईरान, न ही ब्रिटेन और न अमेरिका, किसी एक देश का कब्जा नहीं रहा था। इस पर पुर्तगालियों ने कब्जा किया हुआ था और यहां से गुजरने वाले जहाजों से कर वसूल करता था।

पुर्तगाल ने होर्मुज पर कब किया कब्जा?

ईरान से पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पुर्तगाल ने 1507 में कब्जा किया था। वो इस मार्ग पर तब पहुंचे थे, जब वो 1507 में फारस की खाड़ी में पहुंचे और भारत जाने का रास्ता खोज रहे थे। इसके लिए पुर्तगाली अफ्रीका के चारों ओर चक्कर लगा रहे थे। इसी समय उनकी नजर होर्मुज नामक छोटे द्वीप पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने इस द्वीप पर एक किला और एक सीमा शुल्क बनाया ताकि रेशम, मसाले, मोती और अरबी घोड़ों जैसे वस्तुओं का व्यापार करने जहाज गुजरा करते थे, जिनसे शुल्क वसूलने के लिए इसे बनाया गया था।

पुर्तगाल का काफी विरोध

पुर्तगाली अधिकारियों ने इस रास्ते के लिए 'कार्टाजा' जारी किया, जिसे फारस की खाड़ी में व्यापार करने की सशुल्क अनुमित कहा जाता था। हिस्ट्री चैनल की एक रिपोर्ट में लावेयर विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर रुडोल्फ मैथी के हवाले से बताया गया था कि पुर्तगाल ने खुद को इस इलाके में सहायक शक्ति बना लिया था। इतना ही नहीं वे काफी दमनकारी भी हो गए थे। इसलिए उनका काफी विरोध भी हुआ।

Created On :   8 April 2026 8:31 PM IST

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