US-Israel Iran War: 'नेताओं की हुई हत्याओं पर देश की सशस्त्र सेना नहीं रुकने ...' ट्रंप की चेतावनियों पर ईरानी सुप्रीम लीडर की सख्त प्रतिक्रिया

नेताओं की हुई हत्याओं पर देश की सशस्त्र सेना नहीं रुकने ... ट्रंप की चेतावनियों पर ईरानी सुप्रीम लीडर की सख्त प्रतिक्रिया
मिडिल ईस्ट संघर्ष पर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बयान जारी कर रहे हैं। इस बीच, उनके बयानों पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने पलटवार किया है।

डिजिटल डेस्क, तेहरान। मिडिल ईस्ट संघर्ष पर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बयान जारी कर रहे हैं। इस बीच, उनके बयानों पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने पलटवार किया है। उन्होंने सोमवार को अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा कि उनकी नेताओं की हुई हत्याओं पर ईरानी सशस्त्र सेना नहीं रुकने वाली है। उन्होंने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर जारी किया है।

अमेरिका को दिया सख्त जवाब

मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ा जवाब देते हुए बताया, "हत्या और अपराध ईरान के सशस्त्र बलों को रोक नहीं सकते।" इसके साथ ही उन्होंने अपने देश की मिलिट्री सिस्टम और उसकी प्रतिक्रियात्मक क्षमता पर जोर दिया और कहा, "हाल ही में इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरानी सैन्य कमांड स्ट्रक्चर को निशाना बनाकर हमले किए गए, लेकिन इसके बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुई है।"

इजरायली सेना प्रवक्ता ने प्लानिंग का किया दावा

ईरानी सुप्रीम लीडर का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब इजरायली अधिकारियों ने कहा था कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी माजिद खादेमी और कुद्स फोर्स के स्पेशल ऑपरेशन कमांडर असगर बाघेरी अमेरिका-इजरायल हमले में मौत हो गई।

इजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी का कहना है कि बाघेरी ने इजरायली और अमेरिकी लक्ष्यों पर टारगेट की प्लानिंग बनाई थी। इसके साथ-साथ सीरिया और लेबनान में भी कई हमलों को अंजाम दिया था।

ट्रंप की धमकियों पर प्रतिक्रिया

मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप की उन धमकियों की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने बताया था कि वो ईरान को पाषाण युग में धकेलने का काम कर रहा है। खामेनेई ने आगे कहा, "दुश्मन लापरवाही से कह रहा है कि अपने हमलों के जरिए ईरान को पाषाण युग में भेजना चाहता है।" उन्होंने बताया, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे हर दिन युद्ध, धमकियों और तबाही का डंका और जोर से पीट रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुपचाप बैठी हुई हैं और वे शायद इस आक्रामकता में उनकी सहभागी भी हैं।"

Created On :   7 April 2026 12:06 AM IST

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