दैनिक भास्कर हिंदी: अब तक 1000 रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या, 3 लाख पहुंचे बांग्लादेश

September 9th, 2017

डिजिटल डेस्क, यंगून। म्यांमार के रखाइन प्रांत में जारी हिंसा में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आ रही है। मरने वालों में सबसे ज्यादा करीब 85-90 प्रतिशत रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के सदस्य हैं। संयुक्त राष्ट्र ने शनिवार को कहा कि 15 दिनों में करीब 3 लाख रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश पहुंचे हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 20 हजार से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश पलायन कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार रखाइन प्रांत में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की संख्या सरकारी आंकड़ों से लगभग दोगुनी है। पिछले केवल दो सप्ताहों में 1,64,000 नागरिक भागकर बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में चले गए हैं। इनमें से ज्यादातर रोहिंग्या हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ने बताया, '25 अगस्त के बाद से लगभग दो लाख 90 हजार रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश पहुंचे हैं।'

एक समाचार एजेंसी के मुताबिक अंतरक्षेत्रीय समन्वय समूह ने अपनी एक रपट में कहा कि यहां आए नए प्रवासियों में से कोई 1,43,000 प्रवासी अस्थायी बस्तियों और मौजूद शिविरों में रह रहे हैं, जबकि लगभग 90,000 प्रवासियों को स्थानीय समुदायों ने शरण दे रखी है। रपट के अनुसार, इनके अलावा 56,000 रोहिंग्या मुस्लिमों को अस्थायी बस्तियों में रखा गया है।

बांग्लादेश के पास एक शरणार्थी कैंप में रह रहे जहीर अहमद ने बताया है कि उसने अपनी आंखों के सामने अपने परिवारों को मरते देखा है। सेना की हिंसा से बचकर आए जहीर ने बताया कि सेना की ओर से कुछ लोगों को नदी के किनारे रोका गया और उन्हें गोली मार दी गई। जहीर के अनुसार सैनिक व्यस्क लोगों को गोली मार रहे थे और बच्चों को तेज प्रवाह से नदी में फेंक रहे थे। सेना की इस हिंसक कार्रवाई में उनकी 6 साल की बेटी और 6 महीने की हसीना को भी पानी में फेंक दिया गया।

रोहिंग्या इतिहास
रोहिंग्या मुसलमान 15वीं सदी से म्यांमार में बसे हुए हैं। म्यांमार में हमेशा से ही इन्हें बांग्लादेशी प्रवासी माना जाता रहा है। ब्रिटिश काल के समय में साल 1948 तक भारत और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में म्यांमार चले गए थे। म्यांमार में रहे रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या करीब 10 लाख है। यूएन का कहना है कि 1 लाख 23 हजार बांग्लादेश जा चुके हैं। वहीं भारत में करीब 40 हजार से अधिक रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं, जिन्हें भारत ने अपनाने से इंकार कर दिया है।