रूस-यूक्रेन युद्ध: भारत ही नहीं पाकिस्तान और टर्की के लिए भी हमारा तिरंगा बना ढाल, यूक्रेन के चेकपॉइंट्स पर ऐसे बचाई जान

March 2nd, 2022

हाईलाइट

  • पाकिस्तान और टर्की के छात्र भी तिरंगे के सहारे चेकपॉइंट्स पार किया

डिजिटल डेस्क, कीव। यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग में दुनियाभर के कई देशों के छात्र फंसे हुए हैं। रूस की तरफ से लगातार जारी गोलाबारी के कारण बीते मंगलवार एक भारतीय छात्र की मौत हो भी हो गई थी। भारत सरकार यूक्रेन में फंसे छात्रों व नागरिकों को निकालने के ऑपरेशन गंगा अभियान चला रही है और सरकार लगातार यूक्रेन के शहरों में फंसे छात्रों व नागरिकों से तत्काल शहर छोड़कर पड़ोसी देशों में जाने की सलाह दे रही है। जिससे वहां से आसानी के साथ लोगों को वतन लाया जा सकता है।

गौरतलब है कि यूक्रेन के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण वहां से छात्रों को निकाल पाना असंभव था। यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए तिरंगा एक मजबूत ढाल के रूप में सामने आया है। खारकीव और कीव समेत कई शहरों से रोमानिया के बुखारेस्ट पहुंचे भारतीय छात्रों का कहना है कि कई चेकपॉइंट्स से वह केवल भारत के तिरंगे की वजह से सकुशल वापस लौट सके।

तिरंगा भारत की आन-बान-शान है और दिखा दिया कि पूरे विश्व की रक्षा करने में भी सक्षम है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक यूक्रेन के शहरों में फंसे भारतीय छात्रों ने कहा कि कई चेकपॉइंट्स से सुरक्षित निकलने में तिरंगे ने न सिर्फ भारतीयों बल्कि पाकिस्तानी और तुर्की के छात्रों की भी मदद की है। ये भारत के लिए गौरव की बात है कि तिरंगा की ताकत दुनिया भी पहचानती है।

जब देश का तिरंगा विदेशी छात्रों का मददगार

यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की थी कि अपने साथ तिरंगा लेकर शहर को छोड़ें। भारतीय छात्रों ने ऐसा ही किया और देश का तिरंगा हाथ में होने की वजह से उनको रास्ते में चेकपॉइंट्स तक कहीं भी दिक्कतें नहीं आईं। साउथ यूक्रेन के ओडेसा से आए एक मेडिकल स्टूडेंट ने कहा कि हमसे यूक्रेन में कहा गया था कि भारतीय होने के नाते और तिरंगा रखने से हमें कोई तकलीफ नहीं होगी। इन छात्रों ने बताया कि कैसे वह मार्केट से स्प्रे पेंट लाए ताकि भारतीय झंडा बनाया जा सके।

तिरंगे के खुद को बचाने को लेकर छात्र काफी भावुक नजर आए। एक अन्य छात्र ने बताया, 'मैं भागकर मार्केट गया और एक कर्टेन और कलर स्प्रे पेंट लाया। तब मैंने कर्टेन को काटा और उस पर स्प्रे पेंट से तिरंगा बनाया। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ पाकिस्तानी और तुर्की के छात्रों ने भी तिरंगे का इस्तेमाल करके चेक पॉइंट्स को पार किया। ओडेसा से छात्र रोमानिया के मोलोडोवा आए थे। भारतीय तिरंगा न सिर्फ अपने छात्रों बल्कि पाकिस्तान और तुर्की के छात्रों के लिए भी संकट के वक्त ढाल बना। 

दूतावास की सक्रियता से नहीं हुई परेशानी

यूक्रेन के शहर ओडेसा के मोलोडोवा बॉर्डर तक पहुंचे छात्रों की किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। एक छात्र ने बताया कि मोलोडोवा के नागरिक काफी अच्छे थे और उन्होंने मुझे मुफ्त में आवास और टैक्सी मुहैया कराई, ताकि हम रोमानिया पहुंच सके। फंसे हुए छात्र ने बताया कि उन्हें मोलोडोवा में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि भारतीय दूतावास ने पहले से ही जरूरी इंतजाम किए हुए थे। भारतीय दूतावास की वजह से छात्रों को कोई परेशानी नहीं हुई, जिसको लेकर छात्रों ने आभार जताया। दूतावास ने छात्रों के लिए खाने की व्यवस्था के साथ रूकने का भी इंतजाम किए हुए थे। 

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