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थाईलैंड: गुफा से रेस्क्यू हुए बच्चे पहली बार आए मीडिया के सामने, सुनाई अपनी कहानी

July 19th, 2018 12:28 IST
थाईलैंड: गुफा से रेस्क्यू हुए बच्चे पहली बार आए मीडिया के सामने, सुनाई अपनी कहानी

हाईलाइट

  • थाइलैंड की गुफा में फंसे फुटबॉल टीम के खिलाड़ी और कोच रेस्क्यू के बाद पहली बार जनता के सामने आए।
  • इस दौरान इन खिलाड़ियों और उनके फुटबॉल कोच ने मुस्कुराते हुए पारंपरिक अंदाज में 'वाई' अभिवादन किया।
  • बच्चों ने बताया कि जब उन्हें वहां खाना और पीने का पानी नहीं मिल रहा था तो उन्होंने चट्टानों से रिस रहे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाई।

डिजिटल डेस्क, बैंकॉक। थाइलैंड की गुफा में फंसे फुटबॉल टीम के खिलाड़ी और कोच रेस्क्यू के बाद पहली बार जनता के सामने आए। बुधवार को उत्तरी प्रांत के चिआंग राय में इन सभी के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान इन खिलाड़ियों और उनके फुटबॉल कोच ने मुस्कुराते हुए पारंपरिक अंदाज में 'वाई' अभिवादन किया। इन सभी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए और अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। इस बच्चों ने प्रेस ब्रीफिंग से पहले फुटबॉल भी खेला।

बच्चे ऐसे बुझाते थे प्यास
बच्चों ने बताया कि जब उन्हें वहां खाना और पीने का पानी नहीं मिल रहा था तो उन्होंने चट्टानों से रिस रहे पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाई। फुटबॉल टीम के कोच इकफॉल चांचावॉन्ग ने कहा कि उन्हें बहुत बुरा लगा जब उन्हें ये पता चला कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूर्व थाई नेवी डाइवर समन कुनान की मौत हो गई। इन्हीं में से एक वाइल्ड बोर्स के फुटबॉलर अब्दुल सैम ओन (14) ने बचाव के बारे में कहा कि यह एक चमत्कार था।

चार खिलाड़ियों को मिलेगी थाई नागरिकता
कोच ने बताया कि जब गुफा में पानी बढ़ने लगा तो उन्होंने सभी बच्चों से कहा कि वह डरे नहीं, कल तक पानी कम हो जाएगा। जब एक बच्चे से पूछा गया कि जब उन्हें भूख लगी तो सबसे पहले क्या खयाल आया। बच्चे ने जवाब दिया "फ्राइड राइस"। इस बच्चों में से चार खिलाड़ी ऐसे भी है जिनके पास थाइलैंड की नागरिकता नहीं है। वहां के प्रशासन ने अब ये तय किया है कि उन्हें थाइलैंड की नागरिकता दी जाएगी। इसके पेपर भी सबमिट कर दिए गए है।

बच्चे और कोच पूरी तरह से स्वस्थ
इन बच्चों के डॉक्टर ने बताया कि सभी 12 बच्चे और उनके कोच शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन लड़कों के वजन में करीब 3 किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। डॉक्टर्स का कहना था कि गुफा में इन बच्चों का वजन औसतन 4 किलोग्राम कम हो गया था। ये बच्चे करीब दो हफ्ते तक गुफा में फंसे रह गए थे। 13 साल के डोम की दादी खामयू प्रोथेप ने कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे खुशी का दिन है।

प्रेस ब्रीफिंग को रखा गया नियंत्रित
बुधवार को हुई ब्रीफिंग काफी नियंत्रित थी। थाईलैंड के जुंटा नेता प्रयुत चान ओ चा ने मीडिया से इन बच्चों से सवाल पूछने के दौरान सावधानी बरतने की अपील की थी और उनसे ऐसे सवालों से बचने को कहा था कि जिनसे बच्चों को नुकसान पहुंचे। सियांग राय के जन संपर्क विभाग ने मीडिया संगठनों से पहले ही सवाल मंगा लिये थे और उन्हें मनोचिकित्सकों को भेज दिया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।