comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

जापान में बाढ़ से भीषण तबाही, अब तक 76 की मौत, 16 लाख लोग बेघर 

September 04th, 2018 13:13 IST
जापान में बाढ़ से भीषण तबाही, अब तक 76 की मौत, 16 लाख लोग बेघर 

डिजिटल डेस्क, हिरोशिमा। भारत-चीन के बाद अब जापान भी बाढ़ के कहर से जूझ रहा है। जापान के दक्षिणी इलाकों में बीते तीन दिन से लगातार हो रही बारिश ने प्रशासन की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। अब तक बारिश से आई तबाही में 76 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही लापता हुए 28 लोगों के मारे जाने की भी खबर है। बाढ़ के चलते 16 लाख लोग बेघर हो गए है। भारी बारिश के बीच आज क्यूशू और शिकोकू द्वीप के लिये नई आपदा चेतावनी जारी की गई है।

जापान में कई इलाकों में आई बाढ़ को लेकर प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आपदा की इस घड़ी को ‘समय के साथ जंग’ बताते हुए लोगों से हौंसला बनाए रखने की बात कही है। शिंजो आबे ने कहा, ‘‘बचाव अभियान से, लोगों की जान बचाना और उन्हें दूसरे स्थान पर भेजना बहुत मुश्किल है ये काम समय के खिलाफ एक लड़ाई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब भी कई ऐसे लोग हैं जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी बाकी है।’’

दक्षिण के अलावा पश्चिम जापान में भी बारिश से हालात सबसे अधिक खराब हैं। कुछ गांव पूरी तरह डूब गए हैं, जहां मदद पहुंचने तक कुछ लोगों ने अपने घर की छतों पर पनाह ली। मूसलाधार बारिश से अचानक बाढ़ आ गई और भूस्खलन हुआ। इस कारण से अधिकारियों को करीब 20 लाख लोगों को उनकी जगह से हटाना पड़ा। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और दर्जनों घर भी पूरी तरह तबाह हो गए।

हिरोशिमा प्रांत के आपदा प्रबंधन अधिकारी योशीहीदी फुजीतानी का कहना है कि "हम 24 घंटे बचाव अभियान चला रहे है" जिन लोगों को बचाया गया है उनकी देख-रेख की जा रही है। फुजीतानी ने कहा, ‘‘हम अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं।’’ सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एक विशेष आपदा प्रकोष्ठ का गठन भी किया गया है। मौसम विज्ञान एजेंसी ने आज दो नए क्षेत्रों में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया।

शिंजो सरकार के प्रवक्ता योशिदी सुगा ने कहा कि बारिश संबंधी घटनाओं में 76 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन अभी यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। सुगा ने कहा कि करीब 92 लोगों के ठिकानों का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग घटनाओं, जैसे कार बहने आदि में, 100 से ज्यादा लोगों के हताहत होने की खबरें मिली हैं। उन्होंने बताया कि राहत मिशन में 40 के करीब हेलीकॉप्टर लगे हुए हैं। 

कमेंट करें
YMRNE
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।