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म्यांमार: सेना ने तख्तापलट को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर फायरिंग की, दो लोगों की मौत और 20 घायल

म्यांमार: सेना ने तख्तापलट को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर फायरिंग की, दो लोगों की मौत और 20 घायल

हाईलाइट

  • पहले रबर की गोलियां चलाईं, फिर असली
  • तख्तापलट के बाद ये पहली बार इतनी संख्या में लोग घायल हुए
  • यदानाबोन बंदरगाह के कर्मचारी भी तख्तापलट के विरोध में शामिल

डिजिटल डेस्क, यांगून। म्यांमार के मंडले शहर में सुरक्षाबलों के सैन्य सत्ता का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने की खबर मिली है। शहर के आपात मेडिकल सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि इसमें कम से कम दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है और करीब 20 लोग घायल हुए हैं।

बता दें देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडाले में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें दो प्रदर्शनकारियों की मौत भी हुई है। जानकारी मिली है कि एक प्रदर्शनकारी के सिर में गोली लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति के सीने में गोली लगी और अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।

पहले रबर की गोलियां चलाईं, फिर असली
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हड़ताल कर रहे शिपयार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की पुलिस से झड़प हुई थी, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलाईं। बाद में सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर असली गोलियां चलाईं।

तख्तापलट के बाद ये पहली बार इतनी संख्या में लोग घायल हुए
इस महीने म्यांमार में हुए तख्तापलट के बाद ये पहली बार है, जब विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इससे पहले यांगून में विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक युवा महिला म्या त्वे त्वे कांग की मौत हो गई थी। उन्हें सर पर गंभीर चोट आई थी।

देश की जनता अब सेना के तख्तापलट से परेशान
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें असली गोली लगी थी, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है। ब्रिटेन में मौजूद म्यांमार की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की नेता आंग सान सू ची की प्रवक्ता डॉक्टर विन नियांग ने बीबीसी से कहा है कि म्यांमार की सेना को सत्ता से निकालने के लिए अंततराष्ट्रीय समुदाय को दबाव बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की जनता अब सेना के तख्तापलट से परेशान हो चुकी है। उन्हें अब तानाशाही नहीं चाहिए, वो इस तरह के शासन को स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सेना फिर से गणतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए लोगों के नेताओं को सरकार बनाने दे इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन पर दबाव डालना होगा।”

यदानाबोन बंदरगाह के कर्मचारी भी तख्तापलट के विरोध में शामिल
गौरतलब है कि यदानाबोन बंदरगाह के कर्मचारी भी तख्तापलट का विरोध करने वालों के साथ शामिल हो गए, जिन्हें दबाने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों और सैनिकों को तैनात किया गया था। बंदरगाह कर्मचारियों ने चुनी हुई सरकार के हाथों में सत्ता सौंपे जाने तक काम का बहिष्कार करने का ऐलान किया।

इंटरनेट बंद, इसलिए सटीक जानकारी नहीं मिल रही
म्यांमार आर्मी ने तख्तापलट के बाद से ही देश में इंटरनेट ब्लॉक कर दिया है। सेना बेहद शातिर तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ अपने प्रोपेगंडा के लिए कर रही है। सेना ने दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दोनों ही बार इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की गई। इस दौरान इंटरनेट के जरिए दुनिया को यह बताने की कोशिश की गई कि देश में सब कुछ सही चल रहा है।

सेना ने कहा- चुनाव जरूर कराएंगे
म्यांमार की सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल जे मिन तुन ने तख्तापलट के बाद मंगलवार को पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कहा- हमारी कोशिश यह है कि देश में जल्द से जल्द नए चुनाव कराए जाएं और जो पार्टी जीते उसे सत्ता सौंप दें। कई बार पूछे जाने के बावजूद मिन ने यह नहीं बताया कि नए चुनाव कब कराए जाएंगे। इतना जरूर कहा कि एक साल के पहले इमरजेंसी नहीं हटाई जाएगी। साथ ही यह भी साफ कर दिया कि सेना ज्यादा वक्त तक सत्ता में नहीं रहना चाहती। मिन ने कहा कि हम यह गारंटी देते हैं कि चुनाव कराए जाएंगे। सेना ने कुछ देर के लिए इंटरनेट खोला और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लाइव स्ट्रीम किया गया।

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