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मरियम नवाज को चौधरी शुगर मिल्स मामले में जमानत

मरियम नवाज को चौधरी शुगर मिल्स मामले में जमानत

हाईलाइट

  • कोर्ट ने मरियम को जमानत के तौर पर 2 करोड़ के दो बॉण्ड पेश करने के निर्देश दिए
  • पासपोर्ट सरेंडर करने और 70 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि जमा करने के भी निर्देश

डिजिटल डेस्क, लाहौर। लाहौर हाईकोर्ट ने सोमवार को चौधरी शुगर मिल्स मामले में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) नेता मरियम नवाज को जमानत दे दी। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने मरियम को निर्देश दिया कि जमानत के तौर पर दो करोड़ रुपए के दो बॉण्ड पेश किए जाएं। इसके साथ ही मरियम को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने और 70 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि जमा करने का भी निर्देश दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हम इस याचिका को अनुमति देते हैं और याचिकाकर्ता को जमानत के लिए एक-एक करोड़ रुपए के दो बॉण्ड प्रस्तुत करने होंगे। फैसले के बाद न्यायमूर्ति अली बकर नजाफी की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने पीएमएल-एन उपाध्यक्ष की रिहाई का आदेश दिया।

मरियम ने 30 सितंबर को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और गिरफ्तारी के बाद जमानत मांगी थी। अपने पिता नवाज शरीफ की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने 24 अक्टूबर को एक याचिका दायर की, जिसमें मानवीय कारणों और मौलिक अधिकारों के आधार पर तत्काल जमानत मांगी गई थी। अदालत ने 31 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मरियम ने अपनी जमानत याचिका में यह कहते हुए अंतरिम गिरफ्तारी जमानत की मांग की थी कि उनके परिवार को एक फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले में फंसाया गया है और वह पीड़ित हैं।

मरियम को अगस्त में राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। एनएबी ने दावा किया कि उन्होंने उक्त मामले में सह-अभियुक्त पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और अन्य को सहायता और धन उगाही करने में मदद की है। एजेंसी ने मरियम पर संपत्ति का लाभ उठाने का भी आरोप लगाया। बुधवार को मरियम के वकील अमजद परवेज ने दलील दी कि आरोपी सीएसएम की लाभार्थी नहीं हैं और न ही उन्होंने सक्रिय रूप से इसके निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में काम किया था।


 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।