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Japan: भूकंप के तेज झटकों से थर्राई पूरे देश की धरती, रिक्टर स्केल पर 7.0 रही तीव्रता, सुनामी का खतरा नहीं

Japan: भूकंप के तेज झटकों से थर्राई पूरे देश की धरती, रिक्टर स्केल पर 7.0 रही तीव्रता, सुनामी का खतरा नहीं

हाईलाइट

  • फुकुशिमा प्रांत में भूकंप के तेज झटके
  • राजधानी टोक्यो तक में महसूस हुआ
  • भारत, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान में भी आया था भूकंप

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। ताजिकिस्तान और भारत सहित कई देशों की धरती कांपने के 24 घंटे के भीतर शनिवार शाम करीब 7.37 बजे जापान में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई है। भूकंप का सबसे ज्यादा असर फुकुशिमा प्रांत में रहा। स्थानीय मीडिया के अनुसार प्लांट मं अब तक कोई असामान्य बात नजर नहीं आई है। बता दें कि फुकुशिमा में बड़ा न्यूक्लियर प्लांट है। यहां एक्सपर्ट की टीम निरीक्षण करने पहुंच गई है। जापान की मेटेरोलॉजिकल एजेंसी ने कहा है कि इस भूकंप से सुनामी का खतरा नहीं है।

जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र राजधानी टोक्यो से करीब 306 किलोमीटर दूर जमीन से 60 किमी गहराई में था। इसी जगह 10 साल पहले भी बड़ा भूकंप आया था। तब उठी सुनामी की लहरों ने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को तबाह कर दिया था। तब इसे पर्यावरण को नुकसान के लिहाज से बड़ी घटना माना गया था।

भारत, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान में भी आया था भूकंप
बता दें कि शुक्रवार देर रात करीब 10.30 बजे उत्तर भारत के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान और ताजिकिस्तान में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.3 मापी गई। देश में दिल्ली, नोएडा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस दौरान लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे।

2011 में भूकंप के बाद सुनामी से हुई थीं 16 हजार मौतें
जापान में मार्च 2011 में 9 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के कारण जबर्दस्त सुनामी आई थी। तब समुद्र में उठी 10 मीटर ऊंची लहरों ने कई शहरों में तबाही मचाई थी। इसमें करीब 16 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसे जापान में भूकंप से हुआ अब तक का सबसे बड़ा नुकसान माना जाता है।

रिंग ऑफ फायर पर बसा है जापान
जापान भूकंप के सबसे ज्यादा सेंसेटिव एरिया में है। यह पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आता है। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कॉन्टिनेंटल प्लेट्स के साथ ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी मौजूद हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है। इनके असर से ही सुनामी आती है और वॉल्केनो भी फटते हैं। दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग ऑफ फायर में आते हैं।

रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर और साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है। 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं। यह इलाका करीब 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने भी एक्टिव वॉल्केनो हैं, उनमें से 75% इसी एरिया में हैं।

किस तरह के भूकंप कितने खतरनाक होते हैं?

  • 0 से 1.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
  • 2 से 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है।
  • 3 से 3.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर होता है।
  • 4 से 4.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
  • 5 से 5.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर फर्नीचर हिल सकता है।
  • 6 से 6.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है. ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
  • 7 से 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतें गिर जाती हैं. जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
  • 8 से 8.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।
  • 9 और उससे ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर भयंकर तबाही मचती है। भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा ताकतवर होता है।

इस कारण आता है भूकंप
भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि इस समय धरती की टेक्टोनिक प्लेटें खिसक रही हैं, जिसकी वजह से इतने भूकंप आ रहे हैं। देश के बड़े इलाकों में ये महसूस किए गए। लोग डरे भी। कुछ जगहों पर हल्का-फुल्का नुकसान भी देखने को मिला, लेकिन अच्छी बात ये रही कि किसी के मरने या घायल होने की खबर नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार दो टेक्टोनिक प्लेटों की बीच में बनी गैस या प्रेशर जब रिलीज होता है, तब भी हमें भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ये हालात गर्मियों में ज्यादा देखने को मिलते हैं। 

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