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चीन ने 10 लाख मुस्लिमों को हिरासत में क्‍यों लिया? लीक दस्‍तावेजों से हुआ खुलासा

चीन ने 10 लाख मुस्लिमों को हिरासत में क्‍यों लिया? लीक दस्‍तावेजों से हुआ खुलासा

हाईलाइट

  • दस्‍तावेजों में लाखों मुसलमानों को हिरासत में रखने की वजह शामिल
  • साल 2009 में हुए दंगे के बाद सरकार ने की थी विरोधी आंदोलन की शुरूआत
  • उइगर मुसलमानों का जबरन चीनीकरण कर रही चीनी सरकार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कश्मीर मुसलमानों की स्थिति पर बयान देने वाला चीन स्वयं अपने ही देश के मुसलमानों को प्रताड़ित कर रहा है। चीन में लाखों उइगर मुसलमान हर दिन शोषण और अत्याचार का शिकार हो रहे हैं। इस बात की पोल हाल ही में लीक हुए चीन सरकार के कुछ अहम दस्तावेजों के जरिए खुली है। इस रिपोर्ट की मानी जाए तो मुस्लिम बहुल पश्चिमी शिंजियांग प्रांत के करीब 10 लाख उइगर मुसलमानों को सरकार द्वारा नजरबंद रखा गया है। वहीं इन दस्तावेजों में उन पर बिलकुल भी रहम ना दिखाने के दिए गए आदेश भी दर्ज हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह दस्तावेज चीन के ही एक नेता द्वारा लीक किए गए हैं।

2009 से रखी गई नींव
साल 2009 में शिंजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों और चीनियों के बीच दंगे भड़क गए थे। इसी के बाद से चीनी सरकार ने कथित आतंकवाद के खिलाफ विरोधी अभियान की नींव रखी थी। साल 2014 में शिंजियांग के ही एक ट्रेन स्टेशन पर उइगर उग्रवादियों द्वारा यात्रियों पर चाकू से हमला किया था, इसमें 31 लोगों की मौत हुई थी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस क्षेत्र का दौरा भी किया था। इसी के बाद से उइगर मुसलमानों के दमन की प्रकिया शुरू कर दी गई थी।

लीक हुए दस्तावेजों में जानकारी है कि इस दौरे के बाद जिनपिंग ने देश के अधिकारियों से कई बैठकें की थी और भाषण दिए थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को आतंकियों का सफाया करने के लिए अभियान चलाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि घुसपैठियों, आतंकवादियों और अलगाववादियों के खिलाफ किसी भी तरह का दया भाव नहीं दिखाया जाए। जिनपिंग ने यह भी कहा था कि आतंकियों का सफाया करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

क्या है अल्पसंख्यकों की स्थिति
विश्व की बड़ी आर्थिक शक्तियों में से एक चीन में अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 2.5 करोड़ है। यह देश की कुल जनसंख्या का 1.71 फीसदी भाग है। शिविरों से बाहर निकल चुके कई मुसलमानों के मुताबिक मजहबी स्वतंत्रता का दावा करने वाला चीन उन्हें इस्लाम त्यागने के लिए मजबूर करता है, चीनी कम्युनिस्ट पार्टियों के समर्थन में नारे लगवाता है और उनके समर्थन में गीत-भाषण सुनाए जाने के लिए उनके साथ जबरदस्ती करता है। इसके अलावा उन पर चीनी भाषा सीखने के लिए दबाव बनाने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रपति की वफादारी की कसमें भी दिलाई जाती हैं। इतना ही नहीं देश में मुसलमानों की आबादी ना बढ़े, इसके लिए मुसलमान महिलाओं का गर्भपात कराया जाता है और महिलाओं की शादी चीनियों से कर दी जाती है। साधारण भाषा में कहा जाए तो उनका चीनीकरण किया जा रहा है।

चीन हिरासत में रखे गए मुसलमानों को बुरी तरह शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। यदि कोई व्यक्ति आदेशों का पालन नहीं करता है, तो उसे भूखा रखा जाता है। सरकार द्वारा मुसलमानों के मजहब में भी हस्तक्षेप किया जा रहा है। सरकार, कई सालों से उइगर मुसलमानों की मजहबी स्वतंत्रता पर अंकुश लगा रही है। उनके दाढ़ी बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है, वे नमाज अदा नहीं कर सकते, कुरआन नहीं पढ़ सकते और रोजा भी नहीं रख सकते। इसके अलावा देश की कई मस्जिदों को भी तोड़ दिया गया है। वहीं नवजात शिशुओं के इस्लामी नाम रखने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।

देश में चरम पर तानाशाही
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उइगर मुसलमान करीब तीन साल से शिविरों में नजरबंद हैं। दस्तावेजों से भी साफ होता है कि चीन पूरी तरह से तानाशाही का रास्ता अपना रहा है। इसमें पाया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मामले को लेकर स्थानीय अधिकारियों को स्कूल की छुट्टी के बाद घर जाते वक्त मुसलमान छात्रों को शांत रखने के आदेश दिए हैं। वहीं यदि कोई छात्र अपने रिश्तेदारों (हिरासत में रखे गए) के बारे में पूछता है तो उन्हें धमकाकर चुप रखने के लिए कहा गया है। साथ ही निर्देश हैं कि छात्रों को बताया जाए कि उनके व्यवहार से उनके माता-पिता की हिरासत की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

महिलाओं का यौन शोषण
उइगर मुसलमान महिलाओं पर किए जाए वाले दुर्व्यवहार की घटनाएं रोंगटे खड़े कर देती हैं। हाल ही में शिविर से भागने में सक्षम हुई एक महिला ने उन पर होने वाले शोषण का खुलासा किया था। उसने बताया कि शिविरों में महिलाओं के साथ हर दिन बलात्कार किया जाता है। साथ ही उनके प्रेगनेंट हो जाने पर उनका गर्भपात कराया जाता है और बुरी तरह से उनकी नसबंदी भी कराई जाती है। इतना ही नहीं, महिलाओं के गुप्तांगों में मिर्ची का पेस्ट भी लगाया जाता है, जो अत्याचारियों के लिए बेहद आम है।

इमरान को उइगर मुसलमानों की खबर ही नहीं
स्वयं को कश्मीरियों का शुभचिंतक बताने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के उइगर मुसलमानों के हालातों से वाकिफ ही नहीं है। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा था कि 'मैंने कभी इस मुद्दे पर जिनपिंग से बात नहीं की। हम अपने देश की इतनी सारी समस्याओं में उलझे हुए हैं कि हमें उइगर मुसलमानों की समस्याओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है।' इमरान ने बताया था कि जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, तब से उनके पास कश्मीर से लेकर अर्थव्यवस्था तक कई समस्याओं की भार है। उन्होंने कहा कि 'मैं चीन के बारे में एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि चीन, पाकिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त है।'

क्या है चीन पर आरोप
कई पश्चिमी देशों द्वारा बार-बार चीन पर मानवाधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया गया। शुरूआत में तो चीन ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से नकार दिया, लेकिन बाद में उसने बताया कि उइगर मुसलमानों को अतिवादों से बाहर निकालने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविरों में रखा गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि इन शिविरों की आड़ में उन पर बेरहमी से अत्याचार किया जा रहा है। इस पर ब्रिटेन ने चिंता जाहिर करते हुए चीन की कड़ी निंदा की थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, जापान और न्यू जीलैंड ने समर्थन दिया था। वहीं इसके विपरीत पाकिस्तान और बेलारूस जैसे कुछ देशों ने चीन के मानवाधिकार के रिकॉर्ड की प्रशंसा की थी।

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Syed Tanvir Ali November 19th, 2019 01:10 IST

Put ban on communist party of India.