होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा काफी तनाव!: तेल-गैस के आयात वाले जहाज बदले रहे अपना रास्ता, भारत इस मार्ग का कर रहा इस्तेमाल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा से हमले शुरू हो गए हैं। इसके बाद दुनिया के लिए सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर से तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच हुए ज्ञापन समझौते (MoU) साइन के बाद कुछ दिनों के लिए तनाव कम हो गया था, लेकिन अब हालात बिगड़ने के बाद ज्यादातर जहाज होर्मुज के बजाय वैकल्पिक रास्ता अपना रहे हैं। एस एंड पी ग्लोबल एनर्जी की एक नई रिसर्च सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि जंग फारस की खाड़ी तेल, एलएनजी और निर्यात को तेजी से कम रही है। ये निर्यात 17 जून को समझौते के बाद बढ़ी थी, लेकिन अब कम हो चुकी है।
भारत अपना रहा है ये रास्ते
एस एंड पी ग्लोबल एनर्जी रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें दावा किया गया है कि भारत होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव से बचने के लिए कच्चे तेल और एलएलजी के आयात को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान की तरफ मोड़ रहा है। इसका मतलब सीधा है कि भारत अपने तेल-गैस की आपूर्ति पूरी करने के लिए वैकल्पिक रास्तों को अपना रहा है।
ईरान ने दी चेतावनी?
वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके तेल एक्सपोर्ट को रोकने का प्रयास किया जाता है तो वह फुजैरा पाइपलाइन और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन समेत अन्य वैकल्पिक रास्तों को तबाह कर सकता है।
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फारस की खाड़ी में कितना मौजूद है LNG?
जुलाई के बीच तक सिर्फ कतर के सात एलएनजी से लदे हुए जहाज में लगभग 0.57 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी होने का अनुमान लगाया था। लेकिन एस एंड पी ग्लोबल का अनुमान है कि फारस की खाड़ी में मौजूदा समय में लगभग 1.9 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी मौजूद है, जो टैंकरों में लदी हुई है। अगर आगामी हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट में प्रभावी नाकेबंदी में ढील मिल जाती है तो ये निर्यात तेजी से बढ़ सकता है।
Created On :   18 July 2026 5:12 PM IST













