PM Modi On Nuclear Power: तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी डिजाइन वाले रिएक्टर ने शुरू किया न्यूक्लियर रिएक्शन, पीएम मोदी ने दी जानकारी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित न्यूक्लियर एनर्जी संयंत्र में क्रिटिकैलिटी को हासिल कर लिया है। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि भारत का परमाणु कार्यक्रम इसी क्रिटिकैलिटी की राह पर आगे बढ़ता जाता है तो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनने में बिल्कुल भी वक्त नहीं लगेगा। इसका असर ये होगा कि भारत जल्द से जल्द पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा पैदा करने की जगह स्वच्छ अक्षय ऊर्जा प्रोड्यूस करने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाएगा।
कैसे करता है काम?
यह रिएक्टर आम परमाणु संयंत्रों से अलग है। जहां दूसरे रिएक्टर ईंधन खर्च करते हैं, वहीं यह रिएक्टर काम करते-करते नया ईंधन भी तैयार करता है। इसमें खास तरह का ईंधन इस्तेमाल होता है, जो प्रतिक्रिया के दौरान बेकार माने जाने वाले पदार्थ को भी फिर से उपयोगी बना देता है। यह रिएक्टर ईंधन को बढ़ाने का काम करता है।
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भारत के लिए क्यों है जरूरी?
भारत में यूरेनियम कम मात्रा में है, लेकिन थोरियम काफी ज्यादा मिलता है। यह रिएक्टर थोरियम का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद कर सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर यह पूरी तरह सफल रहा तो देश लंबे समय तक अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी कर सकेगा।
क्या होती है क्रिटिकल स्थिति?
जब रिएक्टर के अंदर ऊर्जा बनने की प्रक्रिया अपने आप लगातार चलने लगती है, तो उसे क्रिटिकल स्थिति कहते हैं। यह बिजली बनाने की पहली जरूरी सीढ़ी होती है। इसके बाद परीक्षण किए जाते हैं और फिर धीरे-धीरे बिजली उत्पादन शुरू किया जाता है।
पीएम मोदी ने दी जानकारी
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि आज, भारत अपनी सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक अहम कदम उठा रहा है, अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे स्टेज को आगे बढ़ा रहा है। कलपक्कम में देश में डिजाइन और बनाया गया प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्रिटिकैलिटी पर पहुंच गया है। यह एडवांस्ड रिएक्टर, जो अपनी खपत से ज्यादा फ्यूल बना सकता है, हमारी साइंटिफिक क्षमता की गहराई और हमारे इंजीनियरिंग एंटरप्राइज की ताकत को दिखाता है। यह प्रोग्राम के तीसरे स्टेज में हमारे बड़े थोरियम रिजर्व का इस्तेमाल करने की दिशा में एक अहम कदम है। भारत के लिए ये एक गर्व का पल है। हमारे साइंटिस्ट और इंजीनियर को बधाई हो।
Created On :   8 April 2026 12:32 PM IST












