Purchase of Iranian Crude Oil: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत के लिए अच्छी खबर! ईरानी कच्चे तेल की खरीद के लिए रूपये में भुगतान?

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत के लिए अच्छी खबर! ईरानी कच्चे तेल की खरीद के लिए रूपये में भुगतान?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। इन सबके बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। इन सबके बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि भारत ईरान से ज्यादातर कच्चा तेल वहां की करेंसी या डॉलर में नहीं, बल्कि भारतीय रुपये में खरीद रहा है। इसके अलावा कुछ पेमेंट तीसरे देशों के माध्यम से भी किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह लेनदेन ऐसे समय पर शुरू हुआ है, जब युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके साथ ही अमेरिका ने भी ईरान पर लगाए प्रतिबंध अस्थायी रूप से 30 दिनों के लिए हटा दिए हैं।

अमेरिका ने यह प्रतिबंध ईरान में मौजूद कच्चे तेल के लिए हटाए है। इसके बाद से भारत समेत कई देश ईरान से तेल खरीद रहा है। भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से भी कुछ तेल की खेप खरीदी है, इसका ज्यादातर पेमेंट रुपये में हुआ है।

लेनदेन पर सरकारी अधिकारियों की प्रतिक्रिया

मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान से कच्चा तेल खरीदने के लिए पेमेंट का लेनदेन आधार पर स्थानीय करेंसी सेटलमेंट, व्यापार समायोजन और ऑफशोर रूटिंग के मिश्रण निर्भर होता है। एक अधिकारी ने बताया कि ईरान के साथ तेल का लेनदेन रुपये में किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ रकम तीसरे देश के जरिए भी की जा रही है। वहीं, दूसरे अधिकारी ने बताया कि भारत ईरान से कच्चा तेल स्थानीय मुद्रा में खरीदा जा रहा है।

दोनों देशों के बीच लेनदेन का सिस्टम

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि वोस्त्रो खातों के जरिए रुपये में सेटलमेंट किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत रिजस्टर्ड विदेशी संस्थाएं भारत में अपना खाता खुलवा सकती है। इस पेमेंट का निपटान घरेलू संभव हो सके। आगे बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल ईरान, बासमती चावल से लेकर चाय तक की भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए खरीद कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी बैंक काफी हद तक SWIFT वैश्विक मैसेज प्रणाली से बाहर है, जबकि अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापार वाले भारतीय बैंक अपने जोखिम को कम करने के लिए प्रत्यक्ष भागीदारी से बच रहे हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि इसी वजह से ट्रांजैक्शन के लिए उन बैंकों का इस्तेमाल किया जा र हा है, जिनका एक्सपोजर काफी कम है। इतना ही नहीं पेमेंट के लिए देश की एक तीसरी बैंक का इस्तामाल किया जा रहा है, जहां उस बैंक की एक शाखा है।

Created On :   7 April 2026 9:20 PM IST

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