Meeting on Farmers' Issues: केंद्रीय कृषि मंत्री ने पहली बार पांच राज्यों के मंत्रियों के साथ ही बैठक, मिडिल ईस्ट संघर्ष के असर समेत किसानों के कई मुद्दों पर की चर्चा

केंद्रीय कृषि मंत्री ने पहली बार पांच राज्यों के मंत्रियों के साथ ही बैठक, मिडिल ईस्ट संघर्ष के असर समेत किसानों के कई मुद्दों पर की चर्चा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान में एक अहम बैठक की। इसका आयोजन राजधानी जयपुर में किया गया था, जिसमें पांच राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान में एक अहम बैठक की। इसका आयोजन राजधानी जयपुर में किया गया था, जिसमें पांच राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक के दौरान किसानों और खेती के तमाम पहलुओं पर को लेकर बातचीत हुई। बता दें कि केंद्रीय मंत्री ने इस प्रकार के सम्मेलन का आयोजन पहली बार किया है। बताया जा रहा है कि इस प्रकार के चार अन्य सम्मेलन और भी आयोजित होने वाले हैं।

मिडिल ईस्ट का असर

इस सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर भी बातचीत की। जिसमें इसका कृषि पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर पड़ते हुए नजर आ रहा है, जिससे कोई भी मना नहीं कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में उनकी सरकार इस कोशिश में लगी है कि इन हमलों का असर भारत के किसानों पर कम देखने को मिले।

खाद और सब्सिडी पर क्या कहा?

केंद्रीय कृषि मंत्री का कहना है, "भारत में खाद का पर्याप्त भंडार है। रबी और खरीफ की अगली फसलों के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों को हर संभव खाद मुहैया कराई जाएगी। किसानों की खेती के लिए सब्सिडी वाली खाद दूसरी जगह सप्लाई ना हो, इसकी भी व्यवस्था की जा रही है, उसे लेकर भी पैनी निगाह रखने का काम किया जाएगा। फार्मर आईडी के जरिए भी किसानों की हर संभव मदद होगी।"

युद्ध के असर को कम करने के लिए जरूरी प्रयास

शिवराज सिंह ने आगे कहा, "किसानों को युद्ध के असर से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। अच्छे बीज मुहैया कराने के लिए स्थानीय स्तर पर डेमोंसट्रेशन भी कराया जाएगा। जिस राज्य से जितनी भी डिमांड आएगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा। दालों की प्रोसेसिंग के काम के लिए पूरे देश में 1,000 दाल मिल की शुरुआत की जाएगी। किसान चना-मसूर और उड़द का जितना भी उत्पादन करेगा, उसे एक निश्चित मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की जा रही है।"

Created On :   8 April 2026 12:58 AM IST

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